Sambalpur News: अनुगूल जिले के गोपीवल्लभपुर गांव की आदिवासी महिलाएं अपने हक के लिए 127 दिनों से धरना पर बैठी हैं. पिछले 15 जनवरी से कोयला की खदान के अंदर धरना चल रहा है. गांव की महिलाएं शिफ्ट में आंदोलन कर रही हैं. उन्हें 44 डिग्री गर्मी या धूल भरी आंधी, ओले और पत्थर की बारिश की कोई चिंता नहीं है. उनका कहना है कि अगर हमारी जमीन लेकर देश के फायदे के लिए उसका इस्तेमाल करते हैं, हमें हमारा सही हिस्सा (मुआवजा और नौकरी) दें. जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे आंदोलन नहीं छोड़ेंगी, भले ही जान चली जाये.
खतरनाक स्थित में 400 परिवार रह रहे हैं गांव में
जानकारी के अनुसार, इस गांव में अभी भी 400 से ज्यादा परिवार रह रहे हैं. इस गांव के चारों ओर खदान ही खदान है. खदान से कोयला निकालने के लिए बार-बार ब्लास्टिंग होने से सभी घरों की दीवारें और छतें टूट गयी हैं. फिर भी लोग खतरनाक स्थिति में भी गांव में रह रहे हैं. खदान की वजह से उनका सब कुछ खत्म हो गया है, इसलिए उन्होंने तय किया है कि जब तक उन्हें नौकरी और सही मुआवजा नहीं मिलता, वे गांव नहीं छोड़ेंगी. पिछले 127 दिनों से गांव की औरतें अपने बच्चों को लेकर माइनिंग साइट पर जा रही हैं. इस दौरान कई बार माइनिंग साइट पर बनी झोपड़ियों को तोड़ा गया है. उन्हें साइट छोड़ने की धमकी दी गयी है. आखिर में गांव के 15 से ज्यादा लोगों पर केस दर्ज करके उन्हें जेल भेज दिया गया है. फिर भी ये आदिवासी औरतें अपने हक के लिए लड़ रही हैं.
