राउरकेला : स्मार्ट सिटी राउरेकला ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनायी है. केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से जारी क्लीन एयर सर्वे-2026 में राउरकेला को तीन बड़े अवॉर्ड मिले हैं. यह सर्वे हर साल नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) के तहत हवा की गुणवत्ता सुधारने और वायु प्रदूषण के प्रति जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से किया जाता है. इस साल देश के 130 शहरों ने इसमें हिस्सा लिया था, जिसमें राउरकेला ने सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया. तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों या कस्बों की श्रेणी में कलिंगानगर सबसे ऊपर रहा. इसके बाद ओडिशा के अनुगूल और तालचेर का स्थान है.
राउरकेला शहर को मिले कुल तीन अवॉर्ड
इस सर्वे में राउरकेला शहर ने तीन लाख से 10 लाख की आबादी वाली श्रेणी में देशभर में प्रथम स्थान हासिल किया है. इसके अलावा वार्ड नंबर-13 ने 10 हजार से कम आबादी वाली श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान और वार्ड नंबर-14 ने इसी श्रेणी में राज्य स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त किया है. सात सितंबर को क्लीन एयर डे के अवसर पर नयी दिल्ली के इंदिरा पर्यावरण भवन के गंगा ऑडिटोरियम में आयोजित विशेष कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री द्वारा विजेताओं को सम्मानित किया गया. राउरकेला की ओर से सुंदरगढ़ के जिलाधिकारी डॉ शुभंकर महापात्र और राउरकेला महानगर निगम की आयुक्त दीना दस्तगीर ने यह पुरस्कार ग्रहण किया. देश में पहला स्थान हासिल कर पूरे ओडिशा का नाम रोशन करने पर जिलाधिकारी और नगर निगम आयुक्त ने शहर के सभी नागरिकों और दिन-रात सफाई व्यवस्था में जुटे सफाई कर्मचारियों को बधाई दी. विदित हो कि राउरकेला महानगर निगम वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है. इसके तहत कई कदम उठाये गये हैं.
अनुगूल नगरपालिका ने सर्वे में जीता दूसरा पुरस्कार
अनुगूल नगरपालिका ने क्लीन एयर सर्वे की कैटेगरी-3 में पूरे भारत में दूसरा स्थान हासिल किया है. जिलापाल अब्दाल मुहम्मद अख्तर और नगरपालिका के कार्यकारी अधिकारी सत्यप्रकाश त्रिपाठी ने नयी दिल्ली में आयोजित समारोह में यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार ग्रहण किया. यह अनुगूल नगरपालिका की लगातार तीसरी राष्ट्रीय उपलब्धि है. इससे पहले दो बार अनुगूल को तीसरा स्थान मिला था. अनुगूल जैसे औद्योगिक इलाके में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती थी, लेकिन जिलापाल के मार्गदर्शन में धूल नियंत्रण, पौधरोपण, कचरा प्रबंधन और हरियाली बढ़ाने जैसे ठोस कदमों से यह संभव हुआ. यह उपलब्धि अनुगूल को और स्वच्छ, हरा-भरा और स्वस्थ बनाने के लिए प्रेरणा देगी.
