Sambalpur News: अनुगूल जिले में हाथियों का उत्पात लगातार बढ़ता जा रहा है. वन विभाग की ओर से लगातार बैठकें कर इस दिशा में पहल की जा रही है, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकल रहा है. आलम यह है कि यहां के किसान हाथियों के उत्पात से अपनी जान बचाने के लिए स्वयं अपनी फसल उजाड़ने को विवश हो रहे हैं. इसका एक उदाहरण तापस कुमार प्रधान हैं.
वन विभाग कार्यालय से 100 मीटर की दूरी पर है बागानपोकटुंगा गांव के तापस प्रधान की खेती अनुगूल जंगल के करतपटा सेक्शन ऑफिस से सिर्फ 100 मीटर दूर है. उन्होंने केला, आम, खीरा, बैंगन, करेला समेत अन्य सब्जियां उगाई है. हाथियों का झुंड अक्सर केला के बागान में घुस जाता है और बाकी फसलें भी बर्बाद कर देता है. हालात ऐसे हो गये हैं कि हाथी उनकी और उसके परिवार की जान के लिए खतरा बन गये हैं. अपनी और खेत की सुरक्षा के लिए बार-बार वन विभाग को बताने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला. एक बार हाथियों का झुंड घर में घुस गया और चावल भी खा गया.
केला बागान में लगे 1500 पेड़ को किया नष्टतापस प्रधान ने अपने परिवार और पड़ोसियों को बचाने के लिए उसने डरकर दो एकड़ के केला के बागान में लगे 1500 से ज्यादा पेड़ नष्ट कर दिये. इस पर उसने तीन लाख रुपये से ज्यादा खर्च किये थे और 10 लाख रुपये से ज्यादा की आय होने की उम्मीद थी. उन्होंने कहा कि वन विभाग की लापरवाही की वजह से उसे अपने हाथों से केला का बागान नष्ट करने पर विवश होना पड़ा. यह सिर्फ तापस की बात नहीं है, आस-पास के इलाकों के किसान भी तापस जैसी ही परेशानी झेल रहे हैं. उनकी परेशानी दूर करने के लिए किसी ने उनकी नहीं सुनी. लेकिन वन विभाग इस घटना पर मुंह खोलने से कतरा रहा है.
