नोवामुंडी में एल-नीनो से बचाव को लेकर कार्यशाला, किसानों को दी गई जानकारी

West Singhbhum News: नोवामुंडी में आयोजित प्रखंड स्तरीय खरीफ कार्यशाला में किसानों को एल-नीनो के संभावित प्रभावों के बारे में बताया गया. कृषि विशेषज्ञों ने धान के साथ दलहनी फसलों और मोटे अनाजों की खेती अपनाने पर जोर दिया.

नोवामुंडी से सुबोध मिश्रा की रिपोर्ट

West Singhbhum News: झारखंड जिले के पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी प्रखंड सभागार में प्रखंड स्तरीय खरीफ कार्यशाला का आयोजन जिला परिषद सदस्य देवकी कुमारी की अध्यक्षता में दीप प्रज्वलित कर किया गया. कार्यशाला का उद्देश्य किसानों को खरीफ मौसम की खेती, जलवायु परिवर्तन और वैकल्पिक कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना था. 

एल-नीनो के प्रभावों की दी गई जानकारी 

कार्यशाला में किसानों को एल-नीनो के प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई. बताया गया कि एल-नीनो के कारण मानसून कमजोर पड़ सकता है, सूखे की स्थिति पैदा हो सकती है और कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है. इससे बचाव के लिए किसानों को केवल धान पर निर्भर न रहकर वैकल्पिक खेती अपनाने की सलाह दी गई. 

आधुनिक कृषि तकनीकों की दी जानकारी 

विशेषज्ञों ने ऊपरी एवं परती भूमि में मूंग, अरहर और उड़द जैसी दलहनी फसलों की खेती करने और धान के साथ मडुवा, जौ और बाजरा जैसे मोटे अनाज लगाने पर जोर दिया. साथ ही मिट्टी जांच, संतुलित उर्वरक उपयोग, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और कृषि यंत्रों के उपयोग की भी जानकारी दी गई.

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Published by: Sweta vaidya

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