गोइलकेरा से संजय पांडेय की रिपोर्ट
पश्चिम सिंहभूम: 'जाको राखे साइयां, मार सके न कोय...' यह कहावत झारखंड पश्चिमी सिंहभूम स्थित गोइलकेरा प्रखंड के बोरोई गांव के एक व्यक्ति पर बिल्कुल सटीक बैठती है. यहां जिस युवक को परिजनों ने 6 साल पहले मृत मान लिया था और उसकी निशानियों को दफनाकर अंतिम संस्कार कर दिया था, वह आज जिंदा निकला है. हैरान कर देने वाली बात यह है कि वह उत्तर प्रदेश की गोरखपुर जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा कैदी है.
इंदिरा आवास का पैसा निकालने निकला था, फिर हुआ लापता
घटना गोइलकेरा के बोरोई गांव निवासी 36 वर्षीय दुगा मारला की है. करीब छह साल पहले दुगा अपने इंदिरा आवास का पैसा निकालने के लिए गोइलकेरा आया था. काम खत्म होते-होते शाम हो गई, तो वह झाड़गांव स्थित अपनी बहन के घर चला गया. लेकिन उस रात के बाद से वह रहस्यमयी तरीके से अचानक गायब हो गया. परिजनों ने उसकी काफी खोजबीन की, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला. लापता होने के एक साल बाद परिजनों ने उम्मीद छोड़ दी और दुगा के कपड़े व उसकी अन्य पुरानी चीजों को मृत मानकर परंपरा के अनुसार दफना दिया.
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ट्रेन हादसे में गंवा बैठा था मानसिक संतुलन
दुगा के चाचा महेश चंद्र मरला ने बताया कि करीब 10 साल पहले गीतांजलि एक्सप्रेस से यात्रा के दौरान डेरवां और पोसैता के बीच दुगा ट्रेन से नीचे गिर गया था. इस भीषण हादसे के बाद उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई थी. परिजनों ने उसका इलाज रांची के मानसिक आरोग्यशाला में भी कराया था, लेकिन वह पूरी तरह ठीक नहीं हो पाया था.
पति को मृत मान पत्नी ने देवर से रचा ली शादी
दुगा के गायब होने के बाद जब उसकी कोई खबर नहीं मिली, तो उसकी पत्नी मानी कुई ने अपने चचेरे देवर प्रेम सिंह मरला से शादी कर ली. दुगा से उसके तीन बच्चे थे, जबकि दूसरी शादी से एक बच्चा है. वर्तमान में पत्नी अपने नए परिवार के साथ खुशहाल जिंदगी बिता रही थी. घर में दुगा की बुजुर्ग मां शुरू मरला और उसका एक भाई भी रहता है.
नवंबर 2025 में जेल से आई चिट्ठी ने उड़ाए सबके होश
नवंबर 2025 में जब दुगा के घर गोरखपुर जेल से एक चिट्ठी पहुंची, तो पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई. चिट्ठी से खुलासा हुआ कि दुगा मरा नहीं है, बल्कि जिंदा है और उत्तर प्रदेश की गोरखपुर जेल में बंद है. गोरखपुर में किसी व्यक्ति की ईंट से मारकर हत्या करने के आरोप में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था. मानसिक रूप से अस्वस्थ दुगा पर केस चला और हाल ही में अदालत ने उसे उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है. 6 साल बाद उसके जिंदा होने की खबर से एक तरफ जहां परिवार हैरान है, वहीं गांव में भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है.
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