नोवामुंडी से सुबोध मिश्रा की रिपोर्ट
चालीसा के पावन अवसर पर झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी सेंट मेरी चर्च आयोजित तीन दिवसीय आध्यात्मिक साधना कार्यक्रम का समापन रविवार को धन्यवाद पवित्र मिस्सा बलिदान के साथ हुआ. इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने प्रार्थना, मनन और आत्मिक नवजीवन का अनुभव किया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ईसाई समुदाय के लोग उपस्थित रहे, जिसने माहौल को श्रद्धा, विश्वास और भक्ति से पूर्ण बना दिया.
फादर केरोबिन केरकेट्टा के प्रेरक प्रवचन
कार्यक्रम के मुख्य उपदेशक फादर केरोबिन केरकेट्टा, बालेश्वर धर्मप्रांत के केंदुझार पल्ली से पधारे, उन्होंने चालीसा के महत्व को विस्तार से बताया. उनके प्रवचन में बताया गया कि चालीसा का समय आत्मशुद्धि, प्रार्थना, पश्चाताप और ईश्वर के साथ संबंध मजबूत करने का विशेष अवसर है. फादर ने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि सच्ची प्रार्थना और दृढ़ विश्वास के माध्यम से व्यक्ति जीवन की बुराइयों पर विजय पा सकता है और ईश्वर की कृपा से सुंदर, पवित्र और आदर्श जीवन जी सकता है. उन्होंने सभी को प्रेम, क्षमा और सेवा की भावना के साथ जीवन जीने का आह्वान किया.
शिक्षिकाओं और धर्मगुरुओं की सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में फादर मुकेश केरकेट्टा, चर्च के पल्ली पुरोहित फादर जॉर्ज एक्का, सेंट मैरी विद्यालय की धर्म बहनें और विद्यालय की शिक्षिकाएं विशेष रूप से उपस्थित रहीं. उनकी सक्रिय भागीदारी ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई और श्रद्धालुओं को प्रेरित किया. इसके साथ ही सैकड़ों ईसाई समुदाय के लोग भी प्रार्थना में सहभागी बने, जिससे कार्यक्रम का आध्यात्मिक माहौल और भी सुदृढ़ हुआ.
भक्ति और आध्यात्मिक आनंद का वातावरण
पूरे तीन दिन के दौरान चर्च परिसर में शांति, भक्ति और आध्यात्मिक आनंद का वातावरण बना रहा. श्रद्धालुओं ने प्रार्थना, मनन और आत्म-चिंतन में हिस्सा लिया. कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद पवित्र मिस्सा अर्पित किया गया, जिसमें सभी ने ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और अपने जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का संकल्प लिया.
इसे भी पढ़ें: जमशेदपुर के साकची में पथरी के ऑपरेशन के बाद मरीज की मौत, परिजनों का अस्पताल में हंगामा
ईसाई समुदाय के लिए प्रेरक अवसर
यह तीन दिवसीय साधना ईसाई समुदाय के लिए आस्था, एकता और विश्वास को सुदृढ़ करने वाला महत्वपूर्ण अवसर साबित हुई. कार्यक्रम ने न केवल धार्मिक भावनाओं को मजबूत किया बल्कि स्थानीय लोगों में आपसी सहयोग, प्रेम और आध्यात्मिक चेतना को भी बढ़ावा दिया. इस प्रकार चालीसा के अवसर पर आयोजित यह साधना श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणादायक और आत्मिक उन्नति का माध्यम बनी.
इसे भी पढ़ें: जमशेदपुर के सुंदरनगर में सड़क जाम, मुआवजे को लेकर रातभर ग्रामीणों का प्रदर्शन
