नोवामुंडी से सुबोध मिश्रा की रिपोर्ट
Noamundi News: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी कॉलेज के इतिहास विभाग के विद्यार्थियों ने शैक्षणिक भ्रमण के तहत चाईबासा स्थित नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर का दौरा किया. इस दौरान छात्रों को झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई.
शैक्षणिक भ्रमण का उद्देश्य और प्राचार्य का मार्गदर्शन
नोवामुंडी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मनोजित विश्वास के निर्देश पर 25 अप्रैल शनिवार को इतिहास विभाग के विद्यार्थियों को कॉलेज के सहायक प्राध्यापक डॉ. क्रांति प्रकाश, सुमन चातोम्बा और मंजू लता सिंकु के साथ कॉलेज बस द्वारा शैक्षणिक भ्रमण के अंतर्गत चाईबासा स्थित नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर ले जाया गया. शैक्षणिक भ्रमण पर जाने से पूर्व प्राचार्य ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार के भ्रमण से विद्यार्थियों को किताबों से बाहर निकलकर वास्तविक ज्ञान प्राप्त होता है और अपनी संस्कृति और इतिहास को समझने का अवसर मिलता है.
नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर में मिली महत्वपूर्ण जानकारी
केंद्र पर उपस्थित संरक्षक रश्मि कोड़ा और गोवर्धन गोप ने विद्यार्थियों को जानकारी दी कि इस केंद्र को जनजातीय जीवन दर्शन संग्रहालय से भी जोड़ा गया है. यह संग्रहालय मुख्य रूप से झारखंड वन विभाग, टाटा स्टील (OMQ डिवीजन) तथा सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एक्सीलेंस के संयुक्त सहयोग से स्थापित किया गया है. यह संग्रहालय जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक विरासत को प्रदर्शित करता है.
झारखंड की संस्कृति, कला और विरासत से परिचय
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को झारखंड के विभिन्न ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई. इसमें मंदिर स्थलों, शैल एवं गुफा चित्रों, नक्काशियों, शिलालेखों, उत्कृष्ट मूर्तिकला, मिट्टी के बर्तनों तथा प्राचीन खंडहरों का उल्लेख किया गया. विशेष रूप से वांदा, बरकट्टा, करहबाड़ी, बादाम, रामगढ़, इटखोरी एवं सतपहाड़ जैसे स्थलों को मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध बताया गया. इसके साथ ही विद्यार्थियों को झारखंड की पारंपरिक कलाओं – पैतकर कला, जादोपटिया चित्रकला, सोहराय कला, कोइवर कला, गंजू कला, रणातैली कला, प्रजापति कला, मुंडा कला, बिरहोर और भुइयां कला, गोंदना (टैटू) और बॉडी आर्ट के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई. केंद्र में विद्यार्थियों को टाटा स्टील द्वारा निर्मित एक जानकारीपूर्ण डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई, जिससे उन्हें झारखंड की सांस्कृतिक विरासत, जुरासिक युग, पाषाण युग, गुफा कला, कब्र कला गांव की संस्कृति और राज्य के हस्तशिल्प के बारे में समझने का अवसर मिला. प्रकृति व्याख्या केंद्र में विद्यार्थियों को झारखंड की समृद्ध विरासत, हजारों साल पूर्व प्राचीन काल की जीवन शैली, गुफा केंद्रों और विभिन्न युगों की कलाओं के बारे में भी विस्तार से बताया गया. भ्रमण के बाद सभी विद्यार्थी बहुत खुश नजर आए और उन्होंने इसे एक सीख देने वाला अनुभव बताया.
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