अब कुख्यात नक्सली गुणा हांसदा भी करना चाहता है सरेंडर, मुख्यधारा में लौटने जताई इच्छा

Naxalite Surrender: सारंडा का कुख्यात नक्सली गुणा हांसदा अब आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटना चाहता है. सूत्रों के अनुसार उसने गांव के लोगों तक गुप्त संदेश पहुंचाया है. सुरक्षा अभियान और पुनर्वास नीति के कारण क्षेत्र में नक्सली संगठन लगातार कमजोर पड़ते जा रहे हैं. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

गुवा से संदीप गुप्ता की रिपोर्ट

Naxalite Surrender: झारखंड की राजधानी रांची में गुरुवार 21 मई 2026 को 27 नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद अब सारंडा क्षेत्र से एक और बड़ी खबर सामने आ रही है. सूत्रों के अनुसार सारंडा का कुख्यात नक्सली गुणा हांसदा भी अब हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहता है. बताया जा रहा है कि उसने अपने गांव के विश्वसनीय लोगों के माध्यम से आत्मसमर्पण करने की इच्छा जताई है.

हतनाबुरु गांव का रहने वाला है गुणा हांसदा

जानकारी के मुताबिक गुणा हांसदा पश्चिमी सिंहभूम जिले के छोटानागरा थाना क्षेत्र अंतर्गत हतनाबुरु गांव का निवासी है. वह लंबे समय से नक्सली संगठन के सक्रिय दस्ते से जुड़ा रहा है. जंगल और पहाड़ी इलाकों की अच्छी जानकारी होने के कारण संगठन में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती रही है. सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में वह बड़े नक्सली नेताओं के साथ सक्रिय दस्ता में शामिल है और सारंडा के घने जंगलों में छिपा हुआ है. हालांकि अब वह संगठन छोड़कर सामान्य जीवन में लौटना चाहता है.

संगठन छोड़ना चाहता है, लेकिन आसान नहीं रास्ता

ग्रामीण सूत्रों के अनुसार गुणा हांसदा नक्सली संगठन से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसके साथी नक्सली उसे आसानी से अलग नहीं होने दे रहे हैं. बताया जा रहा है कि संगठन को डर है कि आत्मसमर्पण के बाद कई महत्वपूर्ण जानकारियां सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंच सकती हैं. इसी कारण गुणा लगातार सही मौके की तलाश में है ताकि वह दस्ता से निकलकर पुलिस या प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण कर सके. गांव के कुछ लोगों तक उसका गुप्त संदेश भी पहुंचा है, जिसमें उसने सामान्य जिंदगी जीने की इच्छा जताई है.

सुरक्षा अभियान का दिख रहा असर

सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों से लगातार सुरक्षा अभियान चलाए जा रहे हैं. पुलिस, सीआरपीएफ और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के कारण नक्सली संगठन कमजोर पड़ते जा रहे हैं. सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का भी असर दिखाई दे रहा है. कई नक्सली हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं. रांची में हाल ही में हुए सामूहिक आत्मसमर्पण को भी इसी अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है.

ग्रामीण भी चाहते हैं लौटे सामान्य जीवन में

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय तक जंगल और हिंसा के रास्ते पर चलने वाले कई युवक अब सामान्य जीवन जीना चाहते हैं. रोजगार, शिक्षा और परिवार की जिम्मेदारियों के कारण भी नक्सली संगठन से मोहभंग हो रहा है. गांव के लोग चाहते हैं कि गुणा हांसदा जल्द आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा से जुड़े. उनका मानना है कि यदि वह आत्मसमर्पण करता है तो इससे अन्य भटके युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी.

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प्रशासन ने नहीं की आधिकारिक पुष्टि

हालांकि अब तक प्रशासन या पुलिस की ओर से गुणा हांसदा के संभावित आत्मसमर्पण को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. बावजूद इसके सुरक्षा एजेंसियां उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर गुणा हांसदा जैसे सक्रिय नक्सली मुख्यधारा में लौटते हैं तो इससे सारंडा क्षेत्र में शांति और विकास की प्रक्रिया को और मजबूती मिलेगी.

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लेखक के बारे में

Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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