नोवामुंडी : दीरिबुरू पंचायत अंतर्गत नक्सल प्रभावित अति संवेदनशील लिपुंगा में जगदीश केराई नामक युवक के तुगलकी फरमान से ग्रामीणों में दहशत व्याप्त है. ग्रामीण जहां एक ओर विकास की आस लगाये बैठे हैं, वहीं गांव में पंचायती राज व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. आलम यह कि लोग बुनियादी सुविधाओं से भी महरूम हैं. इसी से लगभग पांच सौ लोगों की आबादी जंगल से लकड़ियों की कटाई कर जीविकोपार्जन करने को मजबूर हैं.
ग्रामीण मुंडा दिनेश चांपिया की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित ग्राम सभा की बैठक में उक्त बात का खुलासा हुआ. वन एवं पर्यावरण व संस्कृति संरक्षण समिति की पहल पर उक्त बैठक में ग्रामीणों ने आपबीती सुनायी. विकास के लिए लिपुंगा में दो महिला समूहों, चुंदरी महिला समिति व किरण महिला समिति का गठन किया गया. गांव में स्वयं सहायता समूह का गठन भी किया गया था, लेकिन जगदीश केराई द्वारा महिलाओं को तीर मारने व हुक्का-पानी बंद कराने देने की चेतावनी दिये जाने के कारण सरकार द्वारा कार्यान्वित विकास योजनाएं लागू नहीं हो पा रही हैं. शौचालय निर्माण व उज्ज्वला योजना से ग्रामीण वंचित हैं.
पीएम आवास भी नहीं हैं. चुआं का गंदा पानी पीने को विवश हैं. बच्चे कुपोषण के शिकार हैं. मनरेगा भी फ्लॉप है. हालांकि शहरी क्षेत्र के बड़ाजामदा से जोड़ने के लिए लिपुंगा तक पक्की सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है.इससे ग्रामीणों में विकास की आश जगी है. इस मौके पर वन पर्यावरण व संस्कृति संक्षण समिति के अध्यक्ष हरिचरण सांडिल ने कहा कि जल जंगल व जमीन व पर्यावरणव संस्कृति संरक्षण करने के लिए संघर्ष करने को तैयार रहें. उन्होंने कहा कि अधिकारी गांव तक नहीं आते हैं.
उन्होंने ग्राम सभा में धर्मांतरण करने वाली राष्ट्र विरोधी शक्तियों का प्रतिकार करने को तैयार रहने की अपील ग्रामीणों से की. बैठक में दारा सिंह चांपिया,जींगरन चांपिया,मोतरा चांपिया, जमुना चांपिया, गुलशन चांपिया, नीतिमा कुई,मनी कुई,लुकमी कुई, सुमी कुई,मोटाय चांपिया,गुरा तिरिया,चुंदरी तिरिया,बेरेल कुई,जगदीश केड़ाई,कानू चांपिया,जयपाल चांपिया, बिनूसिंह चांपिया आदि शामिल थे.
