लकड़ी की तस्करी क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या
सामूहिक प्रयास से ही क्षेत्र की समस्या का समाधान
किरीबुरू : सारंडा एवं पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक रहे हैं, लेकिन आज यह एक बड़ा मुद्दा बन गया है, जिसे वन विभाग ही नहीं, बल्कि तमाम लोगों के मिलकर सुलझाना होगा. उक्त बातें सारंडा दौरे पर आये सारंडा के नव नियुक्त डीएफओ रजनीश कुमार ने मेघालया सनसेट प्वाइंट पर पत्रकारों से बातचीत में कही. उन्होंने कहा कि सारंडा की सबसे बड़ी समस्या है लकड़ियों की तस्करी, जंगल की आग, सारंडा में बेरोजगारी की समस्या, प्राकृतिक जलस्रोतों को बचाकर भूमिगत जल-स्तर को ऊंचा बनाये रखना आदि. यह सारा कार्य सामूहिक प्रयास से संभव होगा.
जंगल की आग व पेड़ बचाने वाले होंगे सम्मानित
जंगल की आग एवं लकड़ियों की कटाई रोकने में बेहतर कार्य करने वाले सारंडा के गांवों एवं ग्रामीणों को सरकारी स्तर पर पुरस्कृत किया जायेगा. उन्होंने कहा कि कल सारंडा में छह स्थानों पर लगी आग बुझाई गयी. इस आग से बड़े पेड़ों को नुकसान तो नहीं होगा, लेकिन छोटे पौधे जल जायेंगे जिससे वनों का प्राकृतिक विस्तार प्रभावित होगा. उन्होंने कहा कि वनों की सुरक्षा के लिए दो स्तर की टीमें बनाई जायेंगी, जिसमें पहली टीम तस्करों एवं जंगल काटनेवालों के खिलाफ छापेमारी करेगी एवं पास मौजूद दूसरी टीम आपात स्थिति में उसको तत्काल सहयोग देगी.
सारंडा : बेरोजगारों को रोजगार से जोड़ना जरूरी
उन्होंने कहा कि सारंडा में वर्षों से बंद पड़ी वन संवर्धन (सेल्वीकल्चर), कांटूर स्ट्रेंच कटिंग, जल छाजन, छोटे-छोटे चेकडैम आदि का निर्माण कार्य प्रारम्भ कर सारंडा के वैध गांवों के बेरोजगारों को रोजगार से जोड़ा जायेगा. सैडल में चेकनाका निर्माण समेत तमाम माध्यमों को अपनाकर लकड़ी की तस्करी एवं तस्करों को पकड़ने हेतु व्यापक अभियान चलाया जायेगा. वन एवं पर्यावरण के दुश्मनों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जायेगी. सीमावर्ती ओड़िशा के वन अधिकारियों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित हो चुका है, जिसके जरिये ट्रेनों से होनेवाली लकड़ी की तस्करी समेत इंटर स्टेट सीमाओं पर छापामारी अभियान चलाया जायेगा.
