शंकराचार्य के बयान का किया गया विरोध
चाईबासा : आदिवासी स्वदेशी हैं. आदिवासियों को हिंदू कहना हम आदिवासियों का समूल नाश करना है. आदिवासी मुर्गा की बलि देते हैं और एरे बोंगा करते हैं. क्या शंकराचार्य मुर्गा की बलि देंगे, एरे बोंगा करेंगे. हो समाज के लोग शंकराचार्य से उपरोक्त पूजा कराना चाहते हैं. उक्त बातें मंगलवार को चाईबासा में हुई हो समाज की बैठक में प्रबुद्ध लोगों ने कहीं. बैठक में कहा गया कि हिंदू एक वर्ण व्यवस्था है, शंकराचार्य बताएं की ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र में आदिवासियों को क्या समझते हैं.
हिंदू मूर्ति पूजक हैं, जबकि आदिवासी प्रकृति की पूजा करते हैं. आदिवासी संस्कृति ही दुनिया की प्राचीनतम संस्कृति है. दुनिया के सारे धर्म यहीं से शुरू हुए हैं. शंकराचार्य के बयान से आदिवासी हो समाज काफी आहत हुआ है. ऐसे लोगों के पैर कोल्हान में पड़े हैं. आवश्यकता पड़ने पर कोल्हान का शुद्धिकरण करेंगे. बैठक में मधुसूदन मरला, गब्बर सिंह हेम्ब्रम, चित्रसेन सिंकु, केसी बिरुली, शेरशिंह बिरुवा, कालीचरण बिरुवा, चैतन्य कुंकल, रमेश जेराई, रामेश्वर सिंह कुंटिया, भूषण लागुरी व मुकेश बिरुवा आदि उपस्थित थे.
