आदिवासी दिवस पर पिल्लई हॉल में कार्यक्रम आयोजित
चाईबासा : सरकार ने पंचायत के उपबंध अनुसुचित क्षेत्रों में लागू नहीं कर सुनियोजित षड्यंत्र के तहत आदिवासियों पर आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक एवं शैक्षणिक रूप में गुलामी एवं दासता थोपने का काम किया है. इससे आदिवासियों की पहचान, संस्कृति, स्वायत्तता और प्रतिनिधित्व पर प्रश्न चिह्न लग गया है. इसलिए ‘आबुआ दिशुम रे आबुआ राज’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए संवैधानिक संस्था स्वशासित जिला परिषद का निर्माण आवश्यक है.
उक्त बातें समाजसेवी ज्वाला कोड़ा ने बुधवार को पिल्लई हॉल में दिशुम स्वराज मंच, कोल्हान की ओर से विश्व आदिदवासी दिवस पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला सह ग्रामसभा महासम्मेलन में कही. उन्होंने कहा कि आदिवासियों के गंभीर मुद्दों पर स्थायी रूप से आदिवासियों की आजादी, स्वावलंबन, स्वाभिमान, आत्मनिर्भरता को सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रव्यापी जनांदोलन व चेतना के द्वारा आदिवासी एकता स्थापित करने की जरूरत है.
कार्यक्रम को मधुसुदन हेस्सा, मारंग कोवा, रोयाराम चांपिया आदि वक्ताओं ने संबोधित किया. कार्यशाला की अध्यक्षता डेबरा हेस्सा ने की. इस अवसर पर गोपाल लागुरी, गुरुचरण बानरा, महेंद्र बोबोंगा, महेंद्र गंजू, चंपाय चंद्रशेखर डांगिल, चोकरो सिंकू, सुरेश जेराई, मानसिंह बांकिरा, सुशील कुमार जामुदा, सुलेबा सुंडी, सुमी हेस्सा, नीलिमा कोड़ा समेत काफी संख्या में लोग उपस्थित थे.
