ईरान ने दी धमकी, हमले जारी रहें तो बाब अल मंदेब स्ट्रेट भी होगा बंद, गहराएगा तेल संकट

Iran Us war : होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से विश्व के सामने 20 % ऊर्जा का संकट है, लेकिन अब यह संकट बढ़ने वाला है. ईरान ने यह धमकी दी है कि अगर उसपर हमले जारी रहें, तो वह लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाले बाब अल मंदेब स्ट्रीट को बंद कर देगा. अगर ऐसा हुआ, तो विश्व के सामने तेल संकट और गहरा जाएगा.

Iran Us war : ईरान–अमेरिका युद्ध के 26वें दिन स्थिति और भी गंभीर हो गई है. ईरान ने अमेरिका के 15 सूत्री शांति वार्ता योजना को तो ठुकराया ही है उसने यह धमकी भी दी है कि अगर उसपर हमले जारी रहें, तो वह यमन के पास स्थित बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को भी बंद कर सकता है. इस समुद्री मार्ग को तेल की लाइफलाइन कहा जाता है, क्योंकि यहां से प्रतिदिन 60 से 70 लाख बैरल तेल गुजरता है.

ईरान ने सीधे–सीधे दी युद्ध को बढ़ाने की धमकी

तस्नीम न्यूज एजेंसी ने अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट किया है, जिसमें सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी गई है कि ईरान यह कह रहा है कि अगर हमें उकसाया गया, तो हम युद्ध को नए इलाके (Bab al-Mandeb) तक फैला देंगे. ईरान के इस बयान का साफ अर्थ है कि वह अभी युद्ध रोकने के मूड में बिलकुल भी नहीं है. अगर उसने बाब अल मंदेब स्ट्रेट को बंद किया, तो इसका मतलब है कि युद्ध और बढ़ेगा.

क्या है बाब अल मंदेब और इसके बंद होने से क्या होगा?

बाब अल मंदेब (Bab el-Mandeb Strait) स्ट्रेट एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से होकर दुनिया के बड़े व्यापारिक जहाज गुजरते हैं. तेल वाहक जहाज भी इस मार्ग से गुजरते हैं. अगर इस स्ट्रेट पर युद्ध छिड़ा और मार्ग बाधित हुआ, तो पूरे विश्व पर इसका प्रभाव पड़ेगा. तेल की कीमतें बढ़ेंगी और पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था इससे प्रभावित होगी.


बाब अल मंदेब कहां स्थित है?

बाब अल मंदेब स्ट्रेट अफ्रीका और एशिया के बीच स्थित है. इसके एक तरह यमन है, तो दूसरी तरफ अफ्रीका के देश हैं. यह लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ता है. आगे जाकर यह अरब सागर और हिंद महासागर से मिलता है. इस वजह से इस स्ट्रेट का महत्व बहुत अधिक है. यूरोप और एशिया के बीच जाने वाले जहाज यहीं से गुजरते हैं.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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