नोवामुंडी से सुबोध मिश्रा की रिपोर्ट
Gangaur Festival: झारखंड के नोवामुंडी में मारवाड़ी समाज द्वारा गणगौर पर्व इस वर्ष भी पूरे उत्साह, श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया. बंगाली पड़ा स्थित गणेश मोटर आवास में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. पूरा वातावरण माता गौरी और भगवान शिव के जयकारों से गूंज उठा, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया.
गणगौर पर्व का धार्मिक महत्व
चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला गणगौर पर्व मारवाड़ी समाज के लिए विशेष महत्व रखता है. यह पर्व मुख्य रूप से माता गौरी (पार्वती) और भगवान शिव (ईसर) की पूजा का प्रतीक है. विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की कामना करती हैं. यह पर्व नारी श्रद्धा, समर्पण और पारिवारिक मूल्यों का प्रतीक माना जाता है.
विधि-विधान से की गई पूजा-अर्चना
इस अवसर पर मिट्टी से निर्मित ईसर और गौरी की प्रतिमाओं की विधि-विधान के साथ पूजा की गई. महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सजकर और हाथों में मेहंदी रचाकर पूरे श्रद्धा भाव से आराधना की. पूजा के दौरान पारंपरिक गीत और भजन गाए गए, जिससे आयोजन और भी जीवंत हो उठा.
महिलाओं की सक्रिय भागीदारी
गणगौर पर्व के आयोजन में समाज की कई महिलाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई. इनमें मंजू अग्रवाल, आशा प्रहलादका, रेखा अग्रवाल, किरण अग्रवाल, सुनीता अग्रवाल, खुशी अग्रवाल, पूजा अग्रवाल, यशोदा अग्रवाल, निशा अग्रवाल, सोनिका अग्रवाल, सविता देवी, ज्योति सिंघानिया और नीमिता सिंघानिया सहित अन्य महिलाएं शामिल रहीं. सभी ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाने में अहम योगदान दिया.
सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रदर्शन
यह आयोजन मारवाड़ी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और एकता का प्रतीक बनकर सामने आया. गणगौर पर्व के माध्यम से समाज के लोगों ने अपनी परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का संदेश दिया. इस आयोजन ने नई पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति से जोड़ने का कार्य किया.
विसर्जन की परंपरा का पालन
समारोह के अंत में परंपरा के अनुसार गणगौर की प्रतिमाओं का पवित्र जल में विसर्जन किया जाएगा. यह परंपरा इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो आस्था और श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है. विसर्जन के साथ ही यह पर्व विधिवत संपन्न होगा.
समाज में एकता और भाईचारे का संदेश
गणगौर पर्व ने नोवामुंडी में समाज के लोगों के बीच एकता और भाईचारे को और मजबूत किया. इस आयोजन ने हर वर्ग के लोगों को जोड़ने का काम किया और सभी के मन में आस्था, खुशी और अपनत्व की भावना को गहरा किया. यह पर्व न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ.
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प्रेरणा और गर्व का बना केंद्र
यह आयोजन समाज के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गया. गणगौर पर्व के माध्यम से लोगों ने अपनी परंपराओं और संस्कारों को सहेजने का संदेश दिया. इसने यह साबित कर दिया कि आधुनिक समय में भी पारंपरिक त्योहारों का महत्व कम नहीं हुआ है, बल्कि वे लोगों को जोड़ने का काम करते हैं.
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