प्रभात खबर में समाचार प्रकाशन के बाद जिला स्वास्थ्य टीम ने की जांच
जांच टीम के अनुसार प्रथम दृष्टया यह वर्म गिनी की तरह दिख रहा
गिनी वर्म सोमवार को हरकत कर रहा था, वह जीवित हालत में था
रिम्स से जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले को सार्वजनिक करेगा विभाग
टीम ने कहा- सेल का पानी पीने योग्य नहीं, सीएम को देंगे जानकारी
गिनी वर्म से जुड़े मामले की जांच के लिए मेघाहातुबुरू पहुंची टीम ने संदिग्ध गुनिया का सैंपल लिया, लोगों से पूछताछ की व बचाव के निर्देश दिये
किरीबुरू : मेघाहातुबुरू शहर में गिनी वर्म मिलने संबंधित खबर ‘प्रभात खबर’ के सोमवार के अंक में छपने के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ गयी है. इसे लेकर विभाग की एक स्पेशल टीम सोमवार को जांच के लिए मेघाहातुबुरू टाउनशिप पहुंची. डॉ दिलीप कुमार सिन्हा के नेतृत्व में टीम पहुंची. टीम में मो सामुन आलम, अजमत अजीम (आइडीएसपी), एहसान फारुख, महादेव राम (वेक्टर बोन डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम) व एएनएम रोजमेरी लौरेंस शामिल हैं. मेघाहातुबुरू पहुंचने के बाद टीम मीनू नयन के ए/28/2 क्वार्टर पहुंची. यहां से उन्होंने गिनी वर्म जब्त कर लिया. टीम के अनुसार गिनी वर्म में सोमवार को हरकत कर रहा था. वह जीवित हालत में था.
कई तालाबों का पानी जांच के लिए ले गयी टीम : टीम ने बताया कि क्षेत्र में कहीं और गिनी वर्म नहीं मिला है. उन्होंने मीनू के आवास समेत लोकेश्वर मंदिर तालाब, लेक गार्डेन तालाब व विभिन्न स्थानों के पानी का सैंपल जांच के लिए लिया. टीम के अनुसार सेल से सप्लाई हो रहा पानी पीने योग्य नहीं है. इसकी जानकारी सीएम को दी जायेगी.
किरीबुरु-मेघाहातुबुरू खदान का पानी पीने योग्य नहीं : बीते वर्ष जांच में पाया गया था कि सेल की किरीबुरू-मेघाहातुबुरू खदान से सप्लाई पानी पीने योग्य नहीं है. इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से पानी को फिल्टर कर, मोटे कपड़े से छान व गर्म कर पीने की सलाह दी गयी थी. आवासों के उपर लगे टंकी को नियमित साफ करने को कहा गया था.
72 घंटे के भीतर दिखता है लक्षण : गिनी वर्म संक्रमित मरीजों में 72 घंटे के भीतर लक्षण दिखाई देने लगता है. यह वर्म मरीजों के पैर (90 फीसदी मामले) में घाव कर बाहर निकलने का प्रयास करता है. शरीर के अन्य हिस्सों से यह निकलता है, लेकिन कम. इससे ग्रसित मरीज जिस तालाब या ठहरे जल स्रोत में नहाते हैं, वहां का पानी का इस्तेमाल अन्य को नहीं करना चाहिए.
रिम्स भेजे जायेंगे सैंपल
जब्त गिनी वर्म को जांच के लिए रांची के रिम्स भेजा जायेगा. वहां प्रयोगशाला में इसकी जांच होगी. इसके अलावा पानी के सैंपल की जांच की जायेगी, ताकि पता चल सके कि वर्म यहां के पानी में तो नहीं पनप रहा है. जांच टीम के अनुसार प्रथम दृष्टया में यह वर्म गिनी की तरह दिख रहा है. यह गिनी है या अन्य वर्म जांच के बाद स्पष्ट हो पायेगा.
वर्ष 2000 के बाद गिनी वर्म का मरीज नहीं मिला
स्वास्थ्य टीम के अनुसार वर्ष 2000 के बाद से क्षेत्र में गिनी वर्म से ग्रसित मरीज नहीं मिला है. इसके कारण इसका गिनी वर्म होने की संभावना कम हैं. हालांकि जांच रिपोर्ट के बाद यह साफ हो पायेगा.
पिछले साल भी गिनी वर्म मिला था, रिपोर्ट स्पष्ट नहीं थी
गौरतलब हो कि पिछले साल भी यहां गिनी वर्म के पाये जाने की खबर आयी थी. इसके बाद जांच टीम आयी थी, लेकिन वर्म मरकर सूख गया था. वहीं इसके टुकड़ों में विभक्त होने के कारण जांच के नतीजे स्पष्ट नहीं आये थे. इस बार वर्म से जुड़ी जांच रिपोर्ट आने के बाद जनता में सार्वजनिक की जायेगी.
संदिग्ध गिनी वर्म को जिंदा हालत में जब्त किया गया है. वहीं आसपास के इलाके से पानी के सैंपल लिये गये. सभी को जांच के लिये रांची रिम्स भेजा जायेगा. सेल की पानी सप्लाई पीने योग्य नहीं है. इसकी जानकारी सीएम को दी जायेगी. गिनी वर्म संक्रमित मरीज में 72 घंटे में लक्षण दिखने लगते हैं.
डॉ दिलीप कुमार, टीम के मुखिया
वर्म एकत्रित करने के लिये चाईबासा से चिकित्सक, पैथोलॉजिस्ट, लैब तकनीशियन की टीम मेघाहातुबुरू भेजी गयी. एकत्रित वर्म को फर्निलिन में डालकर जांच के लिए रिम्स भेजा जायेगा. गिनी वर्म की पुष्टि होती है, तो यह गंभीर मामला होगा. केंद्रीय स्तर पर विशेष जांच टीम को इसके खात्मे के लिये क्षेत्र में अभियान चलाने के लिए भेजा जायेगा.
डॉ हिमांशु भूषण बरवार, सिविल सर्जन
