संवाददाता, जामताड़ा: वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रथम चरण में झारखंड के 3500 सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में कराये जा रहे सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) में अब तक 2905 विद्यालयों में कार्य पूरा हो चुका है. शेष विद्यालयों में भी सामाजिक अंकेक्षण का कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा कराने का निर्देश दिया गया है.
2905 विद्यालयों में सोशल ऑडिट पूरा
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से राज्य के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में सामाजिक अंकेक्षण कराया जा रहा है. प्रथम चरण के लिए निर्धारित 3500 विद्यालयों में से 2905 में अब तक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है.
शेष विद्यालयों में भी सामाजिक अंकेक्षण का काम समय पर पूरा कराने को लेकर जिलों को आवश्यक निर्देश जारी किये गये हैं.
अनुमोदित प्रारूप में मांगी गयी रिपोर्ट
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी-सह-जिला कार्यक्रम पदाधिकारी तथा जिला शिक्षा अधीक्षक-सह-अपर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को पत्र जारी किया है.
पत्र के माध्यम से सामाजिक अंकेक्षण के दौरान प्राप्त तथ्यों के आधार पर अनुमोदित प्रारूप में प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.
जिला स्तरीय सुनवाई की कार्यवाही भी देनी होगी
निर्देश में कहा गया है कि सामाजिक अंकेक्षण से संबंधित प्रतिवेदन के साथ जिला स्तरीय सुनवाई की कार्यवाही भी उपलब्ध करायी जाये.
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि सामाजिक अंकेक्षण से प्राप्त तथ्यों और जिला स्तर पर हुई सुनवाई से संबंधित आवश्यक दस्तावेज निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध करायें.
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हर साल कराया जाता है सामाजिक अंकेक्षण
बताया गया है कि शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देश के आलोक में सोशल ऑडिट यूनिट के सहयोग से प्रत्येक वर्ष सरकारी विद्यालयों में सामाजिक अंकेक्षण कराया जाता है.
वित्तीय वर्ष 2026-27 के प्रथम चरण के लिए सामाजिक अंकेक्षण की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और संबंधित विद्यालयों की सूची पहले ही जिलों को उपलब्ध करायी जा चुकी है.
लक्ष्य पूरा करने के लिए अग्रेतर कार्रवाई का निर्देश
राज्य परियोजना निदेशक ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि निर्धारित लक्ष्य की समय पर प्राप्ति के लिए आवश्यक अग्रेतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाये.
शेष विद्यालयों में सामाजिक अंकेक्षण पूरा कराने के साथ-साथ अनुमोदित प्रारूप में रिपोर्ट और जिला स्तरीय सुनवाई की कार्यवाही उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है.
