'मंत्री महोदया, सिमडेगा के गांवों को टापू बनने से बचाएं', दीपिका पांडेय सिंह से मिले विधायक भूषण बाड़ा

Simdega News: सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा ने ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह से मुलाकात कर बरसात में कटने वाले गांवों के लिए पुल, पक्की सड़कें, जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत और विकास योजनाओं में विशेष प्राथमिकता देने की मांग की. मंत्री ने त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया.

सिमडेगा से रविकांत साहू की रिपोर्ट

Simdega News: सिमडेगा जिले के समग्र विकास, ग्रामीण इलाकों की बुनियादी समस्याओं के समाधान और बरसात के दौरान गांवों का मुख्यधारा से संपर्क बनाए रखने के लिए स्थानीय विधायक सह कांग्रेस जिला अध्यक्ष भूषण बाड़ा ने झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह से रांची में मुलाकात की. इस दौरान जिला परिषद सदस्य सह कांग्रेस महिला जिला अध्यक्ष जोसिमा खाखा भी मौजूद रहीं. बैठक में विधायक ने जिले की सड़क, पुल, शिक्षा और ग्रामीण विकास से जुड़े कई अहम मुद्दे मंत्री के सामने रखे. उन्होंने कहा कि सिमडेगा की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए यहां विशेष विकास पैकेज की जरूरत है, ताकि ग्रामीणों को हर मौसम में बेहतर आवागमन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें.

बरसात में टापू बन जाते हैं कई गांव

विधायक भूषण बाड़ा ने मंत्री दीपिका पांडेय सिंह को बताया कि सिमडेगा आदिवासी बहुल जिला है और यहां बड़ी संख्या में गांव पहाड़ियों, जंगलों और नदी-नालों से घिरे हुए हैं. मानसून शुरू होते ही कई नदी-नाले उफान पर आ जाते हैं, जिससे दर्जनों गांवों का जिला मुख्यालय और मुख्य सड़कों से संपर्क पूरी तरह टूट जाता है. ऐसे गांव कई दिनों तक टापू की तरह अलग-थलग पड़ जाते हैं. उन्होंने कहा कि यह समस्या वर्षों पुरानी है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है.

बीमारों को खाट पर ढोने की मजबूरी

विधायक ने कहा कि संपर्क टूटने का सबसे ज्यादा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है. कई बार किसी ग्रामीण की तबीयत अचानक बिगड़ जाती है, लेकिन सड़क और पुल नहीं होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती. मजबूरी में ग्रामीण मरीज को खाट पर लिटाकर उफनती नदी पार कराते हैं. कई मामलों में समय पर इलाज नहीं मिलने से मरीजों की जान तक चली जाती है. उन्होंने कहा कि यह स्थिति किसी भी विकसित समाज के लिए चिंताजनक है और इसे प्राथमिकता के आधार पर बदलने की आवश्यकता है.

पुल और पक्की सड़क निर्माण की उठाई मांग

भूषण बाड़ा ने मंत्री से आग्रह किया कि जिले के सभी ऐसे गांवों की सूची तैयार कराई जाए, जो हर वर्ष बरसात में कट जाते हैं. इन इलाकों में प्राथमिकता के आधार पर पुल, पुलिया और पक्की सड़कों का निर्माण कराया जाए. उनका कहना था कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों को हर मौसम में सड़क संपर्क मिल जाए तो शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, व्यापार और रोजगार जैसे सभी क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ विकास का नहीं बल्कि लोगों की सुरक्षा और जीवन से जुड़ा मुद्दा है.

जर्जर ग्रामीण सड़कों पर जताई चिंता

बैठक में विधायक ने ग्रामीण कार्य विभाग और पथ निर्माण विभाग के अधीन आने वाली सड़कों की बदहाल स्थिति का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि जिले की कई महत्वपूर्ण सड़कें वर्षों से मरम्मत का इंतजार कर रही हैं. जगह-जगह बड़े गड्ढे बन चुके हैं, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को काफी परेशानी होती है. खराब सड़कों के कारण दुर्घटनाओं की संख्या भी बढ़ रही है. उन्होंने इन सड़कों के विशेष सुदृढ़ीकरण, चौड़ीकरण और पुनर्निर्माण के लिए अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराने की मांग की.

स्कूल भवनों की खराब हालत पर चिंता

विधायक भूषण बाड़ा ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े बुनियादी ढांचे का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि जिले के कई सरकारी स्कूलों की इमारतें बेहद जर्जर हो चुकी हैं. कई जगहों पर छत और दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं, जिससे बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा पर खतरा बना रहता है. उन्होंने कहा कि ऐसे भवनों में पढ़ाई कराना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है. इसलिए सभी जर्जर विद्यालय भवनों का तत्काल सर्वे कराया जाए और जहां जरूरत हो वहां पुराने भवनों को हटाकर नए, सुरक्षित और आधुनिक कक्षों का निर्माण कराया जाए.

आदिवासी बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने पर जोर

भूषण बाड़ा ने कहा कि सिमडेगा के अधिकांश सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र आर्थिक रूप से कमजोर और आदिवासी परिवारों से आते हैं. ऐसे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि यदि स्कूल भवन मजबूत होंगे और बुनियादी सुविधाएं बेहतर होंगी तो बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी और अभिभावकों का भरोसा सरकारी विद्यालयों पर बढ़ेगा.

विकास योजनाओं में सिमडेगा को मिले प्राथमिकता

बैठक के दौरान विधायक ने स्पेशल डिवीजन, पथ निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग से मिलने वाली विकास योजनाओं के कोटा में बढ़ोतरी की भी मांग की. उन्होंने कहा कि सिमडेगा आज भी कई विकास मानकों पर राज्य के अन्य जिलों से पीछे है. यहां सड़क, पुल, सिंचाई और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की काफी आवश्यकता है. यदि जिले को अतिरिक्त योजनाएं और बजट मिलेगा तो ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से विकास कार्य पूरे किए जा सकेंगे. इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और लोगों के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा.

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मंत्री ने दिया त्वरित कार्रवाई का भरोसा

ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने विधायक द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को गंभीरता से सुना. उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों से सिमडेगा की समस्याओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी जाएगी. जिन क्षेत्रों में पुल और सड़क निर्माण की सबसे अधिक आवश्यकता है, वहां प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाएगी. मंत्री ने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और किसी भी गांव को बुनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा. बैठक के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और प्रदेश सह प्रभारी श्रीबेला प्रसाद के साथ संगठन की मजबूती और विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी चर्चा हुई. विधायक ने उम्मीद जताई कि मंत्री के सकारात्मक आश्वासन के बाद सिमडेगा की लंबे समय से लंबित विकास योजनाओं को जल्द गति मिलेगी और ग्रामीणों को बरसों पुरानी समस्याओं से राहत मिल सकेगी. आखिर हर साल गांवों का टापू बन जाना कोई प्राकृतिक विरासत नहीं, बल्कि अधूरे बुनियादी ढांचे की कीमत है, जिसे आखिरकार किसी न किसी सरकार को चुकानी ही पड़ती है.

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लेखक के बारे में

Published by: Kumarvishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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