बानो में कुपोषण के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की पहल, 284 बच्चों का हुआ उपचार

बानो प्रखंड में स्वास्थ्य विभाग और आंगनवाड़ी सेविकाओं के प्रयासों से कुपोषण से लड़ रहे हैं. दो वित्तीय वर्षों में 284 बच्चों को सफल उपचार देकर स्वस्थ किया गया है. नियमित स्वास्थ्य जांच और पौष्टिक आहार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

सिमडेगाः कुपोषण के खिलाफ सिमडेगा जिले में चलाए जा रहे अभियान के तहत बानो प्रखंड में स्वास्थ्य विभाग और आंगनवाड़ी सेविकाओं के समन्वित प्रयास से बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बानो स्थित कुपोषण उपचार केंद्र में कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें निर्धारित अवधि तक भर्ती किया जाता है. इस दौरान बच्चों को उपचार के साथ पौष्टिक आहार और फॉलोअप की सुविधा भी दी जा रही है.

गांवों में नियमित स्वास्थ्य जांच

गांवों में प्रत्येक सप्ताह गुरुवार और शनिवार को ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस आयोजित किया जाता है. इस दौरान आंगनवाड़ी सेविका, सहिया, सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी और एएनएम 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच करते हैं. जांच के दौरान कुपोषित पाए जाने वाले बच्चों को आवश्यकतानुसार कुपोषण उपचार केंद्र भेजा जाता है.

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सितंबर में बच्चों को मिला उपचार

सितंबर 2026 में आदर्श जोजो, इशांत जोजो, अनान्या सुरीन और सुष्मीता जोजो जैसे बच्चों को उपचार के लिए प्राथमिकता दी गई. उन्हें आवश्यक दवाइयों के साथ एफ-100, टीएफ और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया गया. उपचार के बाद बच्चों की शारीरिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया.

दो वित्तीय वर्षों में 284 बच्चों का उपचार

आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 157 कुपोषित बच्चों का सफल उपचार कर उन्हें डिस्चार्ज किया गया. वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त 2026 तक 127 बच्चों का सफल उपचार किया जा चुका है. इस तरह दोनों वित्तीय वर्षों में अब तक कुल 284 बच्चों को उपचार के बाद स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज किया गया है.

समय पर पहचान और फॉलोअप पर जोर

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मनोरंजन कुमार एवं डॉ. कमलेश उरांव के अनुसार, कुपोषण से निपटने में समय पर पहचान, उचित उपचार और लगातार देखभाल की महत्वपूर्ण भूमिका है. स्वास्थ्य विभाग द्वारा बच्चों के उपचार के साथ उनके फॉलोअप पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. बानो में चल रही यह पहल स्वास्थ्यकर्मियों, आंगनवाड़ी सेविकाओं और ग्रामीण समुदाय के समन्वित प्रयास का उदाहरण है. कुपोषित बच्चों को समय पर उपचार और पोषण उपलब्ध कराकर उन्हें स्वस्थ जीवन की ओर लौटाने का प्रयास किया जा रहा है. हर स्वस्थ बच्चा जिले के स्वस्थ और सशक्त भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

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By Ravikant

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