रविकांत साहू की रिपोर्ट सिमडेगा. आर्थिक तंगी ने पढ़ाई के रास्ते में भले ही मुश्किलें खड़ी कर दीं, लेकिन बानो प्रखंड के कौवाजोर गांव की अनिमा बागे ने अपने सपनों को कभी खत्म नहीं होने दिया. परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण इंटरमीडिएट के बाद उन्हें अपनी पढ़ाई रोकनी पड़ी, लेकिन सरकारी योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उनके सपनों को फिर से पंख दे दिए.
आर्थिक तंगी के कारण छोड़नी पड़ी थी पढ़ाई
अनिमा बागे एक साधारण परिवार से आती हैं. उनके पिता सुखमन बागे और माता मुनिका बागे मेहनत-मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं. सीमित आमदनी में परिवार के लिए घर का खर्च चलाना ही चुनौती था. ऐसे में शिक्षक प्रशिक्षण की फीस, किताबें और अन्य शैक्षणिक खर्च जुटाना परिवार के लिए संभव नहीं हो पा रहा था. मजबूर होकर अनिमा को अपनी पढ़ाई बीच में रोकनी पड़ी.
सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना पूरे किये अधूरे सपने
इसी दौरान अनिमा को ‘सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना’ की जानकारी मिली. संबंधित विभाग और कर्मियों के सहयोग से उन्होंने योजना के तहत आवेदन किया. प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई. अनिमा के लिए यह राशि महज आर्थिक मदद नहीं थी, बल्कि उनके अधूरे सपने को फिर से शुरू करने का अवसर थी.
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सरकारी सहायता मिलने के बाद दोबारा शुरू की पढ़ाई
वर्ष 2025 की शुरुआत में उन्होंने रांची स्थित एस.पी.जी. महिला प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में नामांकन कराया. अब वह नियमित रूप से शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं और अपने लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ रही हैं. अनिमा कहती हैं कि आर्थिक परिस्थितियों ने उनके सामने कई बाधाएं खड़ी कीं, लेकिन सरकारी सहायता मिलने के बाद उन्हें अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू करने का अवसर मिला. अब उनका सपना शिक्षक बनकर बच्चों को शिक्षित करना और अपने परिवार का नाम रोशन करना है.
छोटा-सा सहयोग भी ला सकता है बड़ा बदलाव
अनिमा की कहानी यह बताती है कि किसी जरूरतमंद बेटी के जीवन में समय पर मिला छोटा-सा सहयोग भी बड़ा बदलाव ला सकता है. सरकारी योजनाएं जब सही लाभुक तक पहुंचती हैं, तो वे सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं देतीं, बल्कि सपनों को पूरा करने का रास्ता भी खोलती हैं.
संघर्ष से सफलता की ओर
संघर्ष से शुरू हुई अनिमा की यह यात्रा अब संकल्प और सफलता की ओर बढ़ रही है. उनके कदम इस उम्मीद को मजबूत करते हैं कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, सही अवसर और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ मंजिल हासिल की जा सकती है.
