स्कूल-कॉलेज खुले रहे, लेकिन उपस्थिति कम
भटकते रहे यात्री, छोटे वाहन चालकों की
रही चांदी
सिमडेगा : उग्रवादी संगठन पीएलएफआइ द्वारा बुलाये गये सिमडेगा बंद से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया. बंद का जिले में व्यापक असर देखा गया. वाहनों के चक्के जाम रहे. दुकानें एवं सभी प्रतिष्ठान बंद रहे. सरकारी दफ्तर खुले रहे, किंतु लोगों की उपस्थिति काफी कम रही. स्कूल-कॉलेज खुले रहे, किंतु दूर दराज से आने वाले विद्यार्थी अनुपस्थित रहे. सड़कें वीरान रही तथा बस स्टैंड में सन्नाटा पसरा रहा.
यात्री बसों के नहीं चलने के कारण यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा. यात्रियों को इधर-उधर भटकते हुए पाया गया, जिसका लाभ छोटे वाहनों ने उठाया. टेंपो वालों में मनमाना पैसे वसूले.
दूरदराज से लोग शहर तक नहीं पहुंच पाये. बंद का विशेष असर दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा. मजदूर व रिक्शा चालक काम की तलाश में शहर तक आये, किंतु काम नहीं मिलने के कारण बैरंग लौट गये. बंद का असर साप्ताहिक हाट बाजार एवं डेली मार्केट पर भी पड़ा. बाजार में कम भीड़ भाड़ देखी गयी. ग्रामीण क्षेत्रों से सब्जियां नहीं आने के कारण सब्जी के दाम में तेजी देखी गयी. बंद का असर न्यायालय कार्य में भी पड़ा. कई वादों का निबटारा नहीं हो पाया. कचहरी परिसर में भी सन्नाटा पसरा रहा.
इधर, जिले के कोलेबिरा, बानो, जलडेगा, बांसजोर, ठेठइटांगर, बोलबा, कुरडेग, केरसई व पाकरटांड़ प्रखंड क्षेत्रों में भी बंद असरदार रहा. बानो एवं ओड़गा रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का परिचालन सामान्य रहा. सभी ट्रेनें समय पर आयी और रवाना हुई.
