खरसावां : सरायकेला-खरसावां जिले में मानसून के साथ ही सर्पदंश की घटनाएं तेजी से बढ़ने लगी हैं. इस वर्ष अगस्त माह के शुरुआती 18 दिनों में ही सर्पदंश के 33 मरीजों को आनन-फानन में इलाज के लिए सदर अस्पताल सरायकेला लाया गया. अस्पताल में समय पर एंटी-स्नेक वेनम मिलने से अधिकांश मरीजों की जान बचायी जा सकी. इलाज के बाद उनकी स्थिति सामान्य है. हालांकि, मंगलवार को खरसावां प्रखंड के संतारी गांव में सर्पदंश के बाद इलाज में देरी के कारण दो मासूम भाई-बहन की मौत हो गयी. इस घटना ने बारिश के मौसम में सर्पदंश को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की जरूरत को फिर सामने ला दिया है.
जून में 67 तो, जुलाई में 53 मरीज हुए भर्ती
सरायकेला सदर अस्पताल से मिले आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में सर्पदंश के 67 मरीजों को इनडोर वार्ड में भर्ती कर इलाज किया गया. सभी मरीज उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौट गये. जुलाई में भी सर्पदंश के 53 मरीज अस्पताल पहुंचे. उनका इलाज किया गया. अगस्त में भी सर्पदंश के मामलों में कमी नहीं आयी है. 18 अगस्त तक 33 मरीज अस्पताल पहुंच चुके हैं.
झाड़-फूंक और अंधविश्वास से बचें : सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ. सरयू प्रसाद सिंह ने आम लोगों से अपील की है कि सर्पदंश की घटना होने पर घबराएं नहीं. झाड़-फूंक अथवा ओझा-गुनी के चक्कर में पड़कर कीमती समय बर्बाद न करें. उन्होंने कहा कि सांप के काटने के बाद पीड़ित को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल पहुंचाना चाहिए. जिला अस्पताल से लेकर पीएचसी और सीएचसी तक एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध कराया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीज का तत्काल उपचार शुरू किया जा सके.
बारिश के पानी से बचने के लिए घरों में घुसते हैं सांप : सर्प मित्र
सरायकेला के सर्प मित्र राजा बारीक के अनुसार, बरसात के मौसम में खेतों, झाड़ियों और सांपों के बिलों में पानी भर जाता है. ऐसे में सांप सुरक्षित स्थान की तलाश में रिहायशी इलाकों और घरों की ओर चले आते हैं. इस दौरान सावधानी बरतना बेहद जरूरी है. उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि रात में अंधेरे में बाहर निकलने से बचें और आवश्यकता पड़ने पर टॉर्च का इस्तेमाल करें. घर के आसपास झाड़ियां और कूड़ा-कचरा जमा नहीं होने दें. रात में सोने से पहले बिस्तर और आसपास की जगह की अच्छी तरह जांच कर लें. बरसात के मौसम में जमीन पर सोने से भी बचना चाहिए.
सर्पदंश में हर मिनट है महत्वपूर्ण
चिकित्सकों के अनुसार सर्पदंश के मामले में समय पर उपचार मिलने से मरीज की जान बचायी जा सकती है. इसलिए सांप के काटने के बाद घरेलू उपचार, झाड़-फूंक या किसी तरह के अंधविश्वास में समय गंवाने के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचाना सबसे जरूरी है. संतारी की घटना इस बात की गंभीर चेतावनी है कि सर्पदंश के बाद इलाज में देरी जानलेवा साबित हो सकती है.
साढ़े तीन वर्षों में 1027 मामले दर्ज
सरायकेला सदर अस्पताल के पिछले साढ़े तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सर्पदंश की स्थिति चिंताजनक है. जनवरी 2023 से 18 अगस्त 2026 तक अस्पताल में सर्पदंश के कुल 1027 मामले दर्ज किये गये हैं. आंकड़ों से स्पष्ट है कि मानसून के दौरान सर्पदंश के मामले लगातार बढ़ते हैं. खासकर जून से अगस्त तक अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ जाती है.
वर्ष 2023 : कुल 201 मामले, जुलाई में सर्वाधिक 45 मामले.
वर्ष 2024 : कुल 246 मामले, जून में सर्वाधिक 43 मामले.
वर्ष 2025 : कुल 332 मामले, जून में सर्वाधिक 60 मामले.
वर्ष 2026 (18 अगस्त तक) : कुल 248 मामले, जून में सर्वाधिक 67 मामले.
