सरायकेला: श्रावण मास की तीसरी सोमवारी पर सरायकेला जिला मुख्यालय भक्ति और उल्लास के रंग में सराबोर हो गया. सोमवार को सैकड़ों श्रद्धालुओं ने गेरुआ वस्त्र धारण कर गाजे-बाजे के साथ भव्य कांवड़ यात्रा निकाली. "बोल बम" और "हर हर महादेव" के जयकारों से पूरा शहर गूंज उठा. कांवड़ यात्रा का शुभारंभ सुबह खरकई नदी के प्रसिद्ध सजय घाट से हुआ. यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ सुबह से ही जुटनी शुरू हो गई थी.
सजय घाट से शुरू हुई पवित्र यात्रा
यात्रा में बच्चे, नौजवान, महिला और पुरुष सभी वर्गों के श्रद्धालु शामिल हुए. सभी ने खरकई नदी में पवित्र स्नान किया. विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने कलशों में गंगाजल भरा और कांवड़ उठाई. गेरुआ वस्त्र, गले में रुद्राक्ष की माला और हाथों में डमरू-त्रिशूल लिए कांवड़िए शिवभक्ति में लीन नजर आए. डीजे की भक्तिमय धुनों पर श्रद्धालु नाचते-गाते हुए आगे बढ़े. रास्ते भर स्थानीय लोगों ने कांवड़ियों पर फूल बरसाकर और शरबत-पानी पिलाकर उनका स्वागत किया. जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए थे जहां स्वयंसेवकों द्वारा कांवड़ियों के लिए फल, प्रसाद और चिकित्सा की व्यवस्था की गई थी.
5 किमी की पदयात्रा कर पहुंचे बाबा बुद्धेश्वर धाम
कांवड़िए करीब 5 किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए सरायकेला के कुदरसाई स्थित प्रसिद्ध बाबा बुद्धेश्वर नाथ मंदिर पहुंचे. मंदिर परिसर को पहले से ही फूलों और लाइटों से सजाया गया था. मंदिर पहुंचते ही कांवड़ियों ने बारी-बारी से बाबा बुद्धेश्वर नाथ का जलाभिषेक किया. साथ ही बेलपत्र, धतूरा और फूल चढ़ाकर मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना की. मंदिर के पुजारियों ने बताया कि श्रावण में हर सोमवार को यहां विशेष पूजा होती है. तीसरी सोमवारी होने के कारण इस बार श्रद्धालुओं की संख्या और भी अधिक थी. जलाभिषेक के बाद मंदिर परिसर में डीजे पर भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया गया.
पूरे शहर में रहा शिवमय माहौल
कांवड़ यात्रा के दौरान पूरे रास्ते सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. सरायकेला थाना की पुलिस के जवान तैनात थे. स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ता भी कांवड़ियों की सेवा में लगे रहे. यात्रा में शामिल एक कांवड़िए ने बताया हर साल हम बाबा के दर्शन के लिए आते हैं. इस बार तीसरी सोमवारी पर जल चढ़ाकर मन को बहुत शांति मिली. प्रशासन और स्थानीय लोगों का सहयोग भी सराहनीय रहा. एक महिला श्रद्धालु ने कहा कि परिवार की सुख-शांति के लिए वह हर साल कांवड़ लेकर आती हैं. बच्चों में भी शिवभक्ति को लेकर काफी उत्साह देखा गया.
प्रशासनिक व्यवस्था
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा रास्ते भर जवानों की तैनाती की गई थी. पुलिस के जवान कांवड़ियों के साथ साथ चलते रहे. इस दौरान ट्रैफिक व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया गया था ताकि वाहनों के आवागमन से कांवड़ियों को कोई परेशानी न हो. श्रावण मास में निकलने वाली यह कांवड़ यात्रा सरायकेला की धार्मिक एकता और आस्था का प्रतीक बन गई है.
