Seraikela Kharsawan News :भाई-बहन संग तीन रथों पर सवार होकर आज मौसीबाड़ी जायेंगे प्रभु
चांडिल. नागा संन्यासियों की अगुवाई में आज निकलेगी ऐतिहासिक रथयात्रा
चांडिल. चांडिल में आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया पर शुक्रवार को प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य रथयात्रा निकलेगी. तीनों विग्रह अपने-अपने रथों पर सवार होकर चांडिल स्टेशन रोड स्थित गुंडिचा मंदिर (मौसीबाड़ी) तक पहुंचेंगे. रथयात्रा की शुरुआत चांडिल के श्री साधुबांध मठिया दशनामी नागा संन्यासी आश्रम से होगी, जहां से श्रद्धालु रथों को खींचते हुए प्रभु को उनके मौसी के घर तक ले जायेंगे. यात्रा को लेकर 27 जून को निकलने वाली रथयात्रा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. इस रथयात्रा में प्रभु जगन्नाथ “नंदीघोष ” रथ पर, बलभद्र (बलराम) “तालध्वज ” रथ पर और देवी सुभद्रा “देवदलन ” रथ पर सवार होकर मौसीबाड़ी पहुंचेंगे. यह रथयात्रा न केवल स्थानीय क्षेत्र में, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों में भी प्रसिद्ध है.
नागा संन्यासियों की अगुवाई में निकलती है रथयात्रा
इस रथयात्रा की सबसे खास बात यह है कि इसका आयोजन नागा संन्यासियों द्वारा किया जाता है. रथयात्रा की शुरुआत अंग्रेजी शासनकाल में एक ही रथ से हुई थी. लेकिन वर्ष 1980 से ब्रह्मलीन महंत परमानंद सरस्वती ने इसे पुरी (ओडिशा) की परंपरा के अनुरूप तीन रथों में विभाजित कर दिया. पूर्व में महाप्रभु अपने भाई और बहन के साथ एक ही रथ पर सवार होकर मौसीबाड़ी जाते थे, लेकिन अब वे अलग-अलग रथों पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हैं. वर्तमान में जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष महंत विद्यानंद सरस्वती के दिशा-निर्देश में यहां रथयात्रा का आयोजन किया जा रहा है. अब जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष महंत विद्यानंद सरस्वती ने यहां की रथयात्रा को नया मुकाम देने का काम किया.रथयात्रा की तैयारियां पूरी
चांडिल के श्रीसाधुबांध मठिया नागा संनयासी आश्रम में रथयात्रा को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारी पूरी हो गयी है. रथायात्रा के दौरान अस्था की डोर खींचने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे. आम से लेकर खास लोग यहां प्रभु जगन्नाथ के रथ को खींच कर जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक पहुंचाते हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
