कोल्हान में लागातार बारिश से स्वर्णरेखा और खरकई नदी का जलस्तर खतरे के निशान के पार

Jharkhand River Overflow: झारखंड में लगातार हो रही बारिश से कोल्हान की नदियां उफान पर हैं. खरकई और स्वर्णरेखा खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं हैं.

Jharkhand River Overflow| सरायकेला, प्रताप मिश्रा : कोल्हान प्रमंडल में लगातार बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. सरायकेला और आसपास के इलाके में भी भारी बारिश हो रही है. सरायकेला जिले की दो प्रमुख नदियां खरकई और स्वर्णरेखा उफान पर हैं. दोनों नदियां खतरे के निशान को पार कर गईं हैं. लगातार 3 दिन से हो रही बारिश के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है.

गैरेज चौक और बिरसा चौक के पास जलजमाव

लगातार बारिश से शहरी क्षेत्र के गैरेज चौक संतोषी मंदिर के समीप सरायकेला-चाईबासा सड़क पर पानी जम गया है. सरायकेला से खरसावां जाने वाली सड़क पर बिरसा चौक के पास गड्ढे में जलजमाव हो गया है, जिससे आवागमन में दिक्कत हो रही है. कभी भी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है.

लगातार वर्षा ने बढ़ाई छाता और रेन कोट की बिक्री

कोल्हान प्रमंडल में लगातार हो रही बारिश की वजह से सरायकेला-खरसावां जिले में रेन कोट और छाते की बिक्री बढ़ गई है. रेन कोट की न्यूनतम कीमत 400 रुपए पहुंच गयी है, तो छाते की कीमत 200 रुपए तक चली गई है. अचानक बिक्री बढ़ने की वजह से दुकानदारों ने पुराना स्टॉक निकालना शुरू कर दिया है.

खेतों में लबालब भरा पानी, किसान खुश

लगातार हो रही वर्षा से खेतों में लबालब पानी भर गया है. इससे किसानों के चेहरे खिल गए हैं. किसानों का कहना है की रोपनी का कम खत्म हो चुका है. इस बारिश से खेतों में पानी जम गया है, जो धान के लिए लाभकारी होंगे.

खरसावां में सोना नदी उफान पर. फोटो : प्रभात खबर

खतरे के निशान से ऊपर बह रही खरकई और स्वर्णरेखा

सरायकेला-खरसावां जिले में बहने वाली खरकई और स्वर्णरेखा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. स्वर्णिरेखा नदी का सामान्य जलस्तर 111 मीटर है. अभी इस नदी का जलस्तर 120 मीटर से अधिक हो गया है. खरकाई नदी में खतरे का निशान 123 मीटर है, जबकि नदी का जलस्तर 131 मीटर को पार कर गया है.

सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन ने किया अलर्ट

सरायकेला-खरसावां जिला प्रसाशन ने लोगों को अलर्ट करते हुए कहा है कि वे नदी किनारे न जाएं. नदी किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर चले जाने की अपील की है. कहा है कि जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण खरकई एवं स्वर्णरेखा नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है.

खरसावां में सड़क पर जमा बारिश का पानी. फोटो : प्रभात खबर

सरायकेला-खरसावां जिले में 70 मिमी हुई बारिश

सरायकेला-खरसावां जिले में अब तक 70 मिलीमीटर बारिश हुई है. सबसे अधिक 74.2 मिमी वर्षा चांडिल में और सबसे कम 64 मिमी वर्षा खरसावां में हुई है. इसके अलावा गम्हरिया में 68.4 मिमी, ईचागढ़ में 70.4 मिमी, कुकड़ू में 68.6 मिमी, नीमडीह में 72.4 मिमी और कुचाई में 72 मिमी बारिश हुई है.

चांडिल डैम के 9 गेट खोले गए

भारी बारिश के बाद सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल डैम के 13 में से 9 गेट को खोल दिया गया है. इस डैम का जलस्तर बढ़कर 182 मीटर हो गया है. डैम के गेट खोले जाने के बाद दर्जनों विस्थापित गांवों में पानी घुस गया है.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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