खरसावां: प्रखंड के मटकोबेड़ा पंचायत भवन परिसर में झारखंड आंदोलनकारियों की बैठक हुई. इसमें वर्षों से लंबित मांगों और सरकार की ओर से अपेक्षित पहल नहीं होने पर विस्तार से चर्चा की गयी. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि आंदोलनकारी अपनी मांगों को लेकर 8 अक्टूबर को खूंटपानी प्रखंड मुख्यालय में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन करेंगे. आंदोलनकारियों ने कहा कि अलग झारखंड राज्य के लिए किये गये संघर्ष और बलिदान के बावजूद उनकी समस्याओं का अब तक अपेक्षित समाधान नहीं हो सका है.
पेंशन से आवास तक, लंबित मांगों पर सरकार से जवाब मांगा
बैठक में आंदोलनकारियों की पेंशन, आवास और स्वास्थ्य सुविधा से जुड़ी मांगें प्रमुखता से उठायी गयीं. इसके अलावा आंदोलनकारियों के बच्चों को सरकारी नौकरी में आरक्षण तथा शहीद परिवारों के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने की मांग भी रखी गयी. आंदोलनकारियों का कहना था कि इन मांगों को लंबे समय से सरकार के समक्ष रखा जा रहा है, लेकिन अब तक ठोस निर्णय नहीं लिया गया है. उनका आरोप है कि मांगों पर कार्रवाई के बजाय लगातार आश्वासन मिलते रहे हैं.
8 अक्टूबर के धरना को सफल बनाने की तैयारी
बैठक में कहा गया कि अब मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जायेगा. 8 अक्टूबर को होने वाले धरना-प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में आंदोलनकारियों से संपर्क करने की रणनीति बनायी गयी है. अधिक से अधिक आंदोलनकारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही संपर्क अभियान चलाया जायेगा. आंदोलनकारियों ने कहा कि धरना-प्रदर्शन के बाद भी यदि सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो आंदोलन को और व्यापक किया जायेगा.
अलग राज्य के संघर्ष का दिया हवाला
आंदोलनकारियों ने कहा कि अलग झारखंड राज्य के गठन के लिए वर्षों तक चले आंदोलन में उन्होंने संघर्ष किया और कई लोगों ने बलिदान दिया. उनके संघर्ष के परिणामस्वरूप अलग राज्य का गठन हुआ, लेकिन आंदोलनकारियों और उनके परिवारों की समस्याएं अभी भी लंबित हैं. बैठक में सरकार से मांगों पर ठोस निर्णय लेने की अपील की गयी. बैठक में अध्यक्ष कोकिल केसरी, सिद्धेश्वर बानरा, वीरसिंह हेम्ब्रम, कैरा जामुदा, राजेन गोडसोरा समेत बड़ी संख्या में आंदोलनकारी उपस्थित थे.
