खरसावांः झारखंड के किसान यदि पारंपरिक खेती के साथ अगेती फूलगोभी की वैज्ञानिक तरीके से खेती करें, तो कम समय में अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं. उद्यान महाविद्यालय, खूंटपानी (चाईबासा) के सब्जी विभाग के सहायक प्राध्यापक सह कनिष्ठ वैज्ञानिक अमित कुमार ने बताया कि सामान्यतः फूलगोभी की खेती ठंड के मौसम में की जाती है, लेकिन अगेती किस्मों का चयन कर जून-जुलाई से इसकी खेती शुरू की जा सकती है. इस समय बाजार में फूलगोभी की उपलब्धता कम रहने के कारण किसानों को अच्छी कीमत मिलती है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होती है.
झारखंड के लिए उपयुक्त हैं ये अगेती किस्में
वैज्ञानिक अमित कुमार ने बताया कि झारखंड की जलवायु को ध्यान में रखते हुए काशी कुंवारी, अर्ली कुंवारी, पूसा अश्विनी, पंत गोभी-3, पूसा कतकी तथा पूसा दीपाली जैसी अगेती किस्मों का चयन करना चाहिए. ये किस्में कम अवधि में तैयार होती हैं और बेहतर गुणवत्ता के फूल देने के साथ अधिक उत्पादन भी देती हैं. उन्होंने कहा कि उन्नत किस्मों के चयन से किसानों को बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलता है.
बीजोपचार और स्वस्थ नर्सरी है सफलता की पहली सीढ़ी
फूलगोभी की अच्छी फसल के लिए सबसे पहले गुणवत्तायुक्त बीज से नर्सरी तैयार करनी चाहिए. बीज बुवाई से पहले प्रति किलोग्राम बीज में दो ग्राम कार्बेन्डाजिम से बीजोपचार करना आवश्यक है. इससे आर्द्र गलन (डैम्पिंग-ऑफ) जैसे बीजजनित रोगों से बचाव होता है. लगभग 20 से 25 दिनों में पौधे रोपाई योग्य हो जाते हैं. स्वस्थ पौध ही आगे चलकर अच्छी उपज का आधार बनते हैं.
वर्षा ऋतु में जल निकासी की व्यवस्था जरूरी
उन्होंने बताया कि मुख्य खेत में पौधों की रोपाई 45×30 सेंटीमीटर की दूरी पर करनी चाहिए. चूंकि जून-जुलाई में वर्षा अधिक होती है, इसलिए खेत में जल निकासी की समुचित व्यवस्था करना अत्यंत आवश्यक है. खेत में पानी जमा होने से जड़ों में सड़न, पौधों की वृद्धि में बाधा तथा विभिन्न रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है. इसलिए किसानों को मेड़ एवं नालियों की व्यवस्था पहले से कर लेनी चाहिए.
संतुलित पोषण से मिलेगा अधिक उत्पादन
वैज्ञानिक ने बताया कि अंतिम जुताई के समय प्रति हेक्टेयर लगभग 100 क्विंटल अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाना लाभदायक होता है. इसके साथ 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 200 किलोग्राम फॉस्फोरस तथा 40 किलोग्राम पोटाश का संतुलित प्रयोग करना चाहिए. रोपाई के समय नाइट्रोजन की एक-तिहाई मात्रा तथा फॉस्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा खेत में दें. शेष नाइट्रोजन को दो बराबर भागों में बांटकर दो बार टॉप ड्रेसिंग के रूप में देने से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन में वृद्धि होती है.
डायमंड बैक मॉथ से बचाव के लिए अपनायें समेकित उपाय
फूलगोभी और बंदगोभी की फसल में डायमंड बैक मॉथ (हीरक पीठ) सबसे अधिक नुकसान पहुंचाने वाला कीट है. इसकी सूंडियां पत्तियों को खाकर उनमें छोटे-छोटे छेद बना देती हैं, जिससे पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है और उत्पादन घट जाता है. इसके नियंत्रण के लिए टमाटर एवं गाजर की सहफसली खेती करना लाभदायक होता है. आवश्यकता पड़ने पर रेनेक्सीपायर 18.5 प्रतिशत एससी की 0.1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी अथवा स्पाइनोसैड 2.5 प्रतिशत एससी की 1.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर अनुशंसित स्टिकर के साथ 10 से 15 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए.
वैज्ञानिक पद्धति से खेती अपनाने की अपील
अमित कुमार ने किसानों से वैज्ञानिक अनुशंसाओं का पालन करते हुए अगेती फूलगोभी की खेती अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि गुणवत्तायुक्त बीज, संतुलित पोषण, उचित जल प्रबंधन और समय पर कीट नियंत्रण से किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. अगेती फूलगोभी की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आय का प्रभावी माध्यम बन सकती है और इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.
