सरायकेला : झारखंड को मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मत्स्य निदेशालय ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए राज्य में कुल 4.23 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य तय किया है. यह पिछले वर्ष के 3.81 लाख मीट्रिक टन उत्पादन की तुलना में 41,600 मीट्रिक टन अधिक है. लगातार हो रही बारिश से जलाशयों और तालाबों में पर्याप्त जलस्तर होने से मत्स्य पालकों में खासा उत्साह है. वहीं कोल्हान प्रमंडल के तीनों जिलों के लिए 71,800 मीट्रिक टन उत्पादन की योजना तैयार की गयी है.
साल-दर-साल बढ़ रहा कोल्हान में उत्पादन का ग्राफ
कोल्हान प्रमंडल में मत्स्य उत्पादन का दायरा तेजी से बढ़ा है. वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रमंडल में 61,200 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ था, जो 2025-26 में बढ़कर 65,500 मीट्रिक टन तक पहुंच गया. सरकारी योजनाओं, अनुदान और आधुनिक तकनीकों के सहारे पारंपरिक खेती के साथ-साथ अब किसान मत्स्य पालन को मुख्य आय का जरिया बना रहे हैं.
सरायकेला-खरसावां जिला राज्य में अव्वल
हजारीबाग के साथ सरायकेला-खरसावां जिला राज्य में मछली उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन चुका है. राज्य के सभी 24 जिलों में सबसे अधिक 29,500 मीट्रिक टन का लक्ष्य इसी जिले को मिला है. चांडिल डैम में विस्थापित समितियों द्वारा संचालित केज कल्चर आज पूरे देश के लिए मॉडल बन चुका है, जिसे देखने दूसरे राज्यों से भी विशेषज्ञ व किसान पहुंच रहे हैं.
जलाशयों, तालाबों और खदानों के गड्ढों का हो रहा इस्तेमाल
सरायकेला-खरसावां में 5 बड़े जलाशयों के अलावा 5,400 छोटे-बड़े तालाबों में मछली पालन हो रहा है. वहीं पश्चिमी सिंहभूम में 6 बड़े जलाशयों, 7,750 तालाबों तथा पनसुंआ व नकटी डैम के साथ-साथ बंद पड़ी खदानों के जलभराव वाले गड्ढों में केज कल्चर तकनीक से मत्स्य पालन कर किसानों की आमदनी बढ़ायी जा रही है.
पिछले आठ वर्षों में उत्पादन की प्रगति
वर्ष सरायकेला-खरसावां (मीट्रिक टन) पश्चिमी सिंहभूम (मीट्रिक टन)
2018-19 18,500 10,670
2019-20 19,200 10,800
2020-21 19,700 11,500
2021-22 21,000 12,800
2022-23 23,600 13,800
2023-24 23,900 16,500
2024-25 24,200 17,500
2025-26 26,500 18,500
कोल्हान के जिलों का लक्ष्य
सरायकेला-खरसावां: 29,500 मीट्रिक टन
पूर्वी सिंहभूम: 21,800 मीट्रिक टन
पश्चिमी सिंहभूम: 20,500 मीट्रिक टन
