साहिबगंज में चल रहे 23 होटल, 18 अबतक बिना फायर सेफ्टी एनओसी के

अग्निकांडों से सबक: क्या साहिबगंज किसी बड़ी त्रासदी के लिए तैयार है

इमरान/सन्नी मंडल. साहिबगंज दिल्ली के एक होटल में हुए भीषण अग्निकांड में दर्जनों लोगों की मौत और बिहार के एक अस्पताल में आग लगने की घटना ने भवनों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश अग्निकांडों में जान-माल के भारी नुकसान का प्रमुख कारण पर्याप्त निकास मार्ग का अभाव, आपातकालीन संसाधनों की कमी और राहत-बचाव कार्य में होने वाली देरी होती है. दिल्ली की घटना में भी मुख्य द्वार बंद हो जाने और वैकल्पिक निकास की कमी के कारण कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने का अवसर नहीं मिल सका. इसी पृष्ठभूमि में साहिबगंज शहर की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा तेज हो गई है. होटलों में एनओसी की स्थिति जिला मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों में कुल 23 होटल संचालित हैं. इनमें से 15 होटलों ने अग्निशमन विभाग से फायर एनओसी प्राप्त कर ली है. अधिकांश होटलों में दो निकास मार्ग उपलब्ध हैं, लेकिन शहर के केवल करीब आधा दर्जन होटलों में ही बैक डोर या अतिरिक्त आपातकालीन निकास की व्यवस्था है. विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आपदा की स्थिति में वैकल्पिक निकास जीवन रक्षक साबित हो सकता है. नर्सिंग होम में व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर शहर के सभी छह निजी नर्सिंग होम अग्निशमन विभाग से अनुज्ञप्ति प्राप्त कर चुके हैं. इसके अलावा सदर अस्पताल के पास भी फायर एनओसी उपलब्ध है. सदर अस्पताल में तीन प्रमुख निकास द्वार हैं, जिससे आपात स्थिति में मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर मानी जाती है. हालांकि स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों, बुजुर्गों और दिव्यांगों की संख्या अधिक रहती है, इसलिए नियमित मॉक ड्रिल, उपकरणों की जांच और कर्मचारियों का प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है. बहुमंजिला भवनों पर सबसे अधिक चिंता साहिबगंज शहर में संकरी सड़कों और घनी आबादी वाले इलाकों में बन रही बहुमंजिला इमारतें सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रही हैं. कई स्थानों पर सड़कें इतनी संकरी हैं कि किसी बड़े हादसे की स्थिति में दमकल वाहनों का पहुंचना मुश्किल हो सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि भवन निर्माण के दौरान केवल मंजिलों की संख्या नहीं, बल्कि खुली जगह, पानी की उपलब्धता और हर मंजिल पर सुलभ निकास मार्ग को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए. सुरक्षा मानकों के पालन की जरूरत भवन निर्माण में अग्नि सुरक्षा के साथ-साथ विद्युत सुरक्षा, जल संचयन और आपदा प्रबंधन से जुड़े मानकों का पालन भी जरूरी है. कई भवनों में अब भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी व्यवस्थाएं नहीं हैं, जो भविष्य की चुनौतियों को बढ़ा सकती हैं. साझी जिम्मेदारी से ही मिलेगा समाधान अग्निशमन विभाग और नगर परिषद का मानना है कि आग लगने की घटनाओं को केवल सरकारी प्रयासों से नहीं रोका जा सकता. होटल मालिकों, नर्सिंग होम संचालकों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और बहुमंजिला भवन मालिकों को भी सुरक्षा मानकों के प्रति गंभीर होना होगा. निकास मार्ग कभी अवरुद्ध न हों, फायर एक्सटिंग्विशर हमेशा कार्यशील अवस्था में रहें, विद्युत तारों की नियमित जांच हो और कर्मचारियों को आपातकालीन प्रशिक्षण दिया जाए. सदर अस्पताल में लगा है अग्निशमन यंत्र साहिबगंज. सदर अस्पताल में आग की घटना से निबटने का पूरा इंतजाम है. सौ बेड वाले सदर अस्पताल के मुख्य द्वार, जनरल वार्ड, महिला वार्ड, पैथोलॉजी लैब, ब्लड बैंक, लेबर रूम, एक्सरे विभाग आदि जगहों पर अग्निशामक यंत्र लगा है. आगलगी की घटना से निबटने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है. अस्पताल में निकासी के तीन रास्ते बनाये गये हैं, जिसमें दो एक ही रास्ते से व तीसरा बर्न वार्ड की तरफ है. अस्पताल प्रशासन का दावा है कि सभी यंत्र चालू हैं. क्या कहते हैं डीएस अस्पताल में आग से निबटने का पूरा इंतज़ाम है. सभी अग्निशामक यंत्र चालू स्थिति में है और इसे संचालित करने के लिए प्रशिक्षित लोग भी मौजूद है. डॉ देवेश कुमार, डीएस, साहिबगंज क्या कहते हैं जिला अग्निशमन पदाधिकारी साहिबगंज. अग्निशमन विभाग 24गुणा सात तैयार मोड में है. सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं. बढ़ती गर्मी और शहरों के बढ़ते घनत्व को देखते हुए लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है. बड़े संस्थानों और इमारतों में अग्नि सुरक्षा की समुचित व्यवस्था, पर्याप्त जल भंडारण तथा चारों तरफ निकास की व्यवस्था होनी चाहिए. होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को विशेष रूप से रसोई घर की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए.छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़ी घटनाओं का कारण बन जाती हैं. मनोज कुमार शुक्ला, जिला अग्निशमन पदाधिकारी, साहिबगंज क्या कहते हैं नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी “सभी बहुमंजिला भवन मालिकों से अनुरोध है कि वे सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अपने भवनों में आवश्यक बदलाव करें और अग्निशमन सुरक्षा की विशेष व्यवस्था सुनिश्चित करें.व्यावसायिक भवनों के आसपास पर्याप्त खुला स्थान और चौड़ी सड़कें होनी चाहिए ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य प्रभावी ढंग से किया जा सके.विभाग लगातार पत्राचार के माध्यम से भवन मालिकों, होटल संचालकों और नर्सिंग होम प्रबंधन को नियमों के पालन के लिए अवगत करा रहा है. अभिषेक कुमार सिंह, कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद, साहिबगंज केस स्टडी – 1: सदर अस्पताल में बिजली के तार में लगी थी आग 18 जून 2025 को साहिबगंज सदर अस्पताल के परिवार नियोजन परामर्श केंद्र के पास बिजली के तार में आग लग गई थी. ओवरलोड के कारण हुए शॉर्ट सर्किट से तार करीब दस मिनट तक धू-धू कर जलता रहा, जिससे अस्पताल में मौजूद मरीजों और परिजनों के बीच अफरा-तफरी मच गई. सूचना मिलने पर पिंटा कुमार ने मौके पर पहुंचकर मुख्य बिजली आपूर्ति बंद की और दीवार पर चढ़कर खराब तार को ठीक किया. बाद में बिजली मिस्त्री ने शॉर्ट सर्किट की पुष्टि करते हुए तार की मरम्मत कर बिजली बहाल कर दी. केस स्टडी – 2: एचडीएफसी बैंक में शॉर्ट सर्किट से लगी आग 23 मार्च 2018 को साहिबगंज शहर के शशिभूषण राय रोड स्थित कलिंगा इंटरनेशनल होटल के प्रथम तल्ले में संचालित एचडीएफसी बैंक में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई थी. होटल में अग्निशमन से जुड़े आवश्यक इंतजाम मौजूद थे, इसके बावजूद आग से काफी नुकसान हुआ था. हालांकि राहत की बात यह रही कि होटल में ठहरे सभी लोगों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई. यह घटना भवनों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी और सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करती है. साहिबगंज में फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी, सिर्फ तीन संस्थानों के पास एनओसी सुनील ठाकुर. साहिबगंज जिला मुख्यालय समेत अनुमंडल और प्रखंड स्तर पर बन रही अधिकांश ऊंची इमारतों में फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी हो रही है. कई भवनों में आग से निपटने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं, जिससे बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है. अग्निशमन विभाग के अनुसार जिले में केवल तीन संस्थानों के पास फायर सेफ्टी की एनओसी है. शहर में अब तक सिर्फ चार ऊंची इमारतों को फायर सेफ्टी एनओसी जारी की गई है. अधिकांश ऊंची इमारतों के पास यह अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं है. 2017 से लागू है नियम झारखंड सरकार ने वर्ष 2017 में ऊंची इमारतों के लिए फायर सेफ्टी एनओसी अनिवार्य करने का आदेश जारी किया था. भवन निर्माण से पहले अग्निशमन विभाग की जांच और स्वीकृति जरूरी है. ऑनलाइन होती है आवेदन प्रक्रिया फायर सेफ्टी एनओसी के लिए झारखंड अग्निशमन विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है. आवेदन के बाद विभागीय अधिकारी स्थल निरीक्षण कर भवन की ऊंचाई, श्रेणी और अग्नि सुरक्षा मानकों की जांच करते हैं. आवश्यक निर्देशों के पालन के बाद ही एनओसी जारी की जाती है. किन भवनों के लिए जरूरी है एनओसी 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले भवनों तथा 500 वर्ग फीट से अधिक क्षेत्रफल वाले निर्माण कार्यों के लिए फायर सेफ्टी एनओसी अनिवार्य है. अस्पतालों और होटलों को भी यह प्रक्रिया पूरी करनी होती है. अग्निशमन विभाग का बयान अग्निशमन पदाधिकारी मनोज कुमार शुक्ला ने कहा कि शहर की कई ऊंची इमारतों ने फायर सेफ्टी एनओसी नहीं ली है. ऐसे भवनों को विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया है.

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Author: ABDHESH SINGH

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