गैस न मिलने पर दुकानदार कोयला व लकड़ी के चूल्हे पर लौटे

साहिबगंज में एलपीजी संकट से होटलों की मीनू और मिठाइयों की वेराइटी घटी

साहिबगंज. साहिबगंज शहर में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत ने आम जनजीवन को गहराई से प्रभावित कर दिया है. घरेलू रसोई से लेकर होटलों और स्ट्रीट फूड दुकानों तक हर जगह इसका असर दिख रहा है. लोग मजबूरी में कोयला, लकड़ी और इलेक्ट्रॉनिक इंडक्शन का सहारा ले रहे हैं. साहिबगंज शहर के दुकानदार और गरीब तबके के लोग सिलेंडर न मिलने के कारण कोयला और लकड़ी के चूल्हे का प्रयोग करने लगे हैं. घरेलू और कॉमर्शियल सिलेंडर की कमी ने छोटे-बड़े होटलों और स्ट्रीट फूड दुकानों को प्रभावित किया है. गैस के दाम के साथ-साथ खाद्य पदार्थों कीमतों में बढ़ोतरी गैस की कमी से खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ गए हैं. चाय पांच रुपये से सात रुपये और स्पेशल चाय 10 रुपये से 12 रुपये हो गई है. इडली 20 रुपये से बढ़कर 25 रुपये प्रति प्लेट और समोसा आठ रुपये से 10 रुपये हो गया है. कॉमर्शियल सिलेंडर की किल्लत ने होटलों के मेन्यू को सीमित कर दिया है. पहले पनीर और चिकन के 10-12 आइटम बनते थे, अब केवल दो-दो आइटम ही परोसे जा रहे हैं. मिठाइयों और नमकीन की वेराइटी भी आधी रह गई है. वैकल्पिक उपायों से बढ़ रही लागत दुकानदारों ने कोयला का सहारा लिया है. पहले एक बोरा कोयला 200 रुपये में मिलता था, अब 400 रुपये में मिल रहा है. लकड़ी की कीमत भी 300 रुपये से बढ़कर 400-500 रुपये प्रति बोझा हो गयी है. इससे चाय, पकौड़ी और अन्य खाद्य पदार्थों के दामों में बढ़ोतरी हो रही है. गैस की कमी से कई ठेले बंद हो गये हैं. ब्रेड, बिस्किट, नमकीन और सेव बनाने वालों की सप्लाई ठप हो गई है. छोटे दुकानदारों का रोजगार प्रभावित हो रहा है और वे मजबूरी में वैकल्पिक साधनों का प्रयोग कर रहे हैं.

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By Rakesh kumar

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