प्रदूषित हो रही गंगा, जलीय जीव व पक्षी पर मंडरा रहा खतरा

एनजीटी के प्रतिबंध के बाद भी धड़ल्ले से जिले में चल रहे हैं अवैध चिमनी भट्ठे

साहिबगंज. जिले में लगभग 100 से अधिक चिमनी और बांग्ला भट्ठा का कारोबार फल-फूल रहा है, परंतु ऐसे कारोबारी को न ही एनजीटी का डर है और ना ही पशु-पक्षी की फिक्र है. और ऐसी हालत में प्रशासन भी ऐसे कारोबारी को कहीं ना कहीं नजरअंदाज करती दिख रही है. जबकि पिछले तीन वर्ष पूर्व एनजीटी द्वारा चिमनी भट्ठा और बांग्ला भट्ठा जैसे उद्योग पर प्रतिबंध लगा दिया था. जिला प्रशासन द्वारा प्रशासनिक बुलडोजर भी चलाया गया लेकिन कारोबारी पर तनिक भी फर्क नहीं पड़ा. जिला प्रशासन को पर्याप्त राजस्व भी नहीं मिलता है, फिर भी इस तरह के कारोबार धड़ल्ले से जारी है. प्रशासनिक व्यवस्था की मानें तो चिमनी भट्ठा हो या गदाई भट्ठा हो, इससे निकलने वाला धुआं जहरीला होता है. इससे आसमान में परवाज करने वाले पक्षियों को काफी नुकसान पहुंचता है. इसी कारण से ऐसे उद्योग धंधे वाले क्षेत्र में पक्षी दिखायी तक नहीं देते हैं. कहीं ना कहीं वायु प्रदूषण हो रहा है और पूरे वायु में जहर फैल रही है जिससे पक्षी ही नहीं बल्कि इंसान को भी नुकसान हो सकता है. आए दिन कम उम्र के भी लोग सांस की बीमारी से जूझते हुए देखे जा रहे हैं और इसका मुख्य कारण वायु प्रदूषण को माना जाता है. बाल मजदूर भी करते हैं काम, नहीं होता है निबंधन : चिमनी हो या फिर ईंट भट्ठा, जहां अधिकांश कर्मियों का निबंधन नहीं होता है, वहीं बाल मजदूरी भी धड़ल्ले से होती है. कारण ऐसे कारोबार में महिला-पुरुष-बच्चे सभी मिलकर दूसरे जगह से पलायन करते हैं और इस काम को करते हैं. इससे स्पष्ट होता है कि ऐसे कारोबार को श्रम विभाग भी नजरअंदाज करता है. लोग बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्र से ईंट बनाने वाले परिवार के लोग महीनों जाकर रहकर काम करते हैं. मजदूरी करना गलत नहीं है लेकिन यदि नियमसंगत किया जाए तो सभी के लिए भला होगा. ईंट कारोबार में गंगा की मिट्टी का होता है प्रयोग : गंगा प्रदूषित होने की बात तब सामने आयी जब यह जानकारी विभाग को लगी की गंगा की मिट्टी का प्रयोग ईंट बनाने में किया जा रहा है. इसको लेकर कई बार अंचल अधिकारी द्वारा छापेमारी कर कार्रवाई भी की गयी, परंतु कार्रवाई के बाद भी कारोबार में कमी नहीं आयी. बताया जाता है कि गंगा की मिट्टी का ईंट काफी बेहतर होता है. यही कारण है कि गंगा की मिट्टी धड़ल्ले से काटकर ले जायी जा रही है. यह गंगा नदी के लिए एक खतरा है. साहिबगंज के मिर्जाचौकी से लेकर बरहरवा के मिर्जापुर तक यह कारोबार धड़ल्ले से जारी है. मिट्टी कटाई का कार्य मिर्जाचौकी के बिहारी गांव के निकट गंगा तट से लेकर राजमहल उधवा से गंगा की मिट्टी को अवैध तरीके से परिवहन कर ईंट बनाने का काम किया जा रहा है. खनन विभाग व परिवहन विभाग कर चुका है कार्रवाई : लगातार मीडिया में गंगा की मिट्टी काटने और ईंट-भट्ठे में मिट्टी का प्रयोग करने की खबर प्रकाशित होने के बाद उपायुक्त के निर्देशानुसार जिला खनन पदाधिकारी और जिला परिवहन पदाधिकारी ने संयुक्त रूप से उधवा में अहले सुबह छापेमारी कर दर्जन भर ट्रैक्टर को जब्त किया था. उसके बाद कड़ी चेतावनी भी दी गयी लेकिन ऐसे कारोबारी चेतावनी और जुर्माना से डरने वाले नहीं हैं. क्या कहते हैं जिला खनन पदाधिकारी : चिमनी भट्ठा को लेकर प्रदूषण फैलाने वाली बात और गंगा से मिट्टी काटने का मामला संज्ञान में आया था. इस पर बड़ी कार्रवाई की जा चुकी है और आगे भी कार्रवाई की जाएगी. – कृष्ण किस्कू, जिला खनन पदाधिकारी, साहिबगंज.

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Published by: Abdhesh singh

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