साहिबगंज मंडलकारा में नौ माह 20 दिन रहा गैंगस्टर सुजीत सिन्हा

झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का साहिबगंज जेल से धनबाद ले जाते समय एनकाउंटर में हुआ अंत। जानें उसके अपराध और गैंग की पूरी कहानी।

बरहरवा (साहिबगंज)

झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा ने साहिबगंज मंडल कारा में नौ महीने 20 दिन गुजारा. यहां पर उसे विशेष सेल में रखा गया था और जेल के अंदर उसकी विशेष निगरानी की जा रही थी. उसके सेल के आसपास किसी भी आम बंदी को बेवजह जाने की अनुमति नहीं थी. उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए हमेशा पुलिस जवान तैनात रहते थे. सुजीत सिन्हा मेदनीनगर केंद्रीय कारा से साहिबगंज मंडल कारा आया था. मेदनीनगर से पूर्व में वह चाईबासा जेल में था, जिसे 10 अगस्त 2025 को चाईबासा से मेदिनीनगर ट्रांसफर किया गया था. वह जहां भी जाता अपना एक साम्राज्य खड़ा कर देता था. अपराध की दुनिया में सुजीत सिन्हा का काफी बड़ा नाम था. झारखंड के जेलों में शराब की पार्टी करने की उसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी. हाल के दिनों में वह राजधानी रांची सहित पलामू, गढ़वा व धनबाद के इलाके में धनबाद के कुख्यात अपराधी पाकिस्तान में बैठा गैंगस्टर प्रिंस खान से संपर्क कर कई घटनाओं को अंजाम दे रहा था. इसके बाद पुलिस ने भी अपनी जांच को तेज कर दी और उसके गुर्गे को पकड़ कर जेल भेजना शुरू किया. कई गुर्गों का हाफ एनकाउंटर भी हुआ.

सुरक्षा के दृष्टिकोण से उसे जब साहिबगंज जेल से धनबाद जेल ले जाया जा रहा था, तभी वह पुलिस एनकाउंटर में मारा गया. वहीं, उसकी पत्नी रिया सिन्हा भी चाईबासा जेल में बंद है और उसके ऊपर भी कई गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिक दर्ज है. उसकी पत्नी रिया सिन्हा सुजीत सिन्हा की अनुपस्थिति में गैंग संभालने का काम करती थी, और उसकी वित्तीय लेन-देन का हिसाब-किताब भी रखा करती थी. जिसके प्रमाण झारखंड पुलिस को मिले हैं. वहीं, धनबाद ले जाने के इस अभियान में बरहरवा एसडीपीओ नितिन खंडेलवाल, राजमहल एसडीपीओ विमलेश त्रिपाठी एवं अन्य पुलिस बल शामिल थे.

राज्य में संगठित अपराध का बड़ा नाम रहा सुजीत सिन्हा

गैंगस्टर सुजीत सिन्हा लंबे समय तक राज्य के संगठित अपराध जगत का बड़ा नाम रहा है. सुजीत सिन्हा शुरुआत में झारखंड के गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव के गिरोह से जुड़ा था. सुशील की मौत के बाद में उसने अपना खुद का सुजीत सिन्हा गैंग बना लिया था, जो पलामू, रांची, रामगढ़ और धनबाद सहित झारखंड के कई जिलों में सक्रिय था. उसके गिरोह पर रंगदारी, हत्या, हत्या का प्रयास, पुलिस पर हमला, अवैध हथियार, विस्फोटक, कोयला और परिवहन कारोबार से जुड़े लोगों से उगाही जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं. सुजीत सिन्हा के खिलाफ भी झारखंड के कई जिलों के विभिन्न थानों में अनेक प्राथमिकी भी दर्ज हैं. रांची, लातेहार (बालूमाथ), रामगढ़, धनबाद तथा अन्य जिलों में हत्या, रंगदारी, आपराधिक षड्यंत्र, आगजनी, विस्फोटक अधिनियम और आर्म्स एक्ट से जुड़े गंभीर मामले दर्ज हैं. सुजीत सिन्हा का गिरोह विशेष रूप से कोयला परिवहन, सड़क निर्माण, ठेकेदारी और बड़े कारोबारियों से रंगदारी वसूलने के लिये कुख्यात माना जाता था. कई मामलों में उसके गिरोह पर धमकी देकर काम रुकवाने, वाहनों में आग लगाने तथा विरोध करने वालों पर जानलेवा हमला करने के आरोप हैं. दिसंबर 2020 में लातेहार जिले के बालूमाथ थाना क्षेत्र में कोयला परिवहन से जुड़े वाहनों में आगजनी, पुलिस पर फायरिंग और विस्फोटक के इस्तेमाल के मामले में जांच एजेंसियों ने सुजीत सिन्हा को प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल किया था. बाद में इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) तक पहुंचीं. दिसंबर 2025 में झारखंड सीआइडी ने सुजीत सिन्हा और उसके गिरोह से जुड़े चार महत्वपूर्ण मामलों की जांच अपने हाथ में ली. पुलिस के अनुसार, इन मामलों के अंतर्राज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क की भी जांच की गयी.

प्रिंस खान के साथ गठजोड़ से दे रहा था घटनाओं को अंजाम

धनबाद का कुख्यात अपराधी प्रिंस खान और गैंगस्टर सुजीत सिन्हा ने मिलकर आपस में गठजोड़ कर लिया था और दोनों मिलकर घटनाओं को अंजाम दे रहे थे. झारखंड के कारोबारियों से न सिर्फ रंगदारी की वसूली कर रहे थे, बल्कि गोलीबारी भी कर रहे थे. इसका खुलासा तब हुआ, जब कुछ महीने पूर्व रांची एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के टीटॉस रेस्टोरेंट में गोलीबारी कर एक कर्मी की हत्या करने के मामले में गिरफ्तार अपराधियों से पूछताछ हुई. रांची पुलिस ने पलामू के कुबेर उर्फ मनीष सिंह उर्फ अमन सिंह, धनबाद के अफजल अमन उर्फ बाबर, धनबाद के पुटकी के पप्पू भुइंया और वासेपुर के मो शादाब आलम उर्फ डॉक्टर को गिरफ्तार किया था. गिरफ्तार अपराधियों ने पूछताछ में पुलिस को बताया था कि टीटॉस रेस्टोरेंट के संचालक से रंगदारी नहीं मिलने की वजह से गोलीबारी की और इस घटना को सुजीत सिन्हा गैंग और प्रिंस खान ने मिलकर अंजाम दिया था. इसके अलावे पलामू में एनएचएआई के फोरलेन निर्माण स्थल पर रंगदारी वसूलने की फिराक में शामिल अपराधियों को जब पुलिस ने गिरफ्तार किया था, तो दोनों गैंग के गठजोड़ का खुलासा हुआ था. अपराधियों ने पुलिसिया पूछताछ में कबूला था कि अगर घटना को सफलतापूर्वक अंजाम दे दिया गया होता तो उसमें सुजीत सिन्हा का नाम बोलना था. और, अगर पकड़े जाते तो विदेश में बैठे कुख्यात अपराधी प्रिंस खान का नाम बोलना था. यह सब ट्रेनिंग सुजीत सिन्हा के गैंग के लोग देते थे और हथियार भी उपलब्ध कराते थे.


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By Abdhesh singh

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