उल्लंघन : बरहेट के केसाफुल्ली में खनन माफिया सक्रिय, विभाग बना मूकदर्श
बरहेट के केसाफुल्ली में बंद खदान से सुरंग बना कर कोयले की अवैध खुदाई हो रही है. वहीं खनन विभाग इससे अनजान है. खनन माफिया कुछ स्थानीय लोगों को मिलाकर यह गोरखधंधा कर रहे हैं. इससे उनकी गाढ़ी कमाई तो हो रही है. लेकिन किसी दिन कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है.
विकास जायसवाल
बरहेट थाना क्षेत्र के केसाफुल्ली में भी अवैध कोयला खदानों से कोयला निकाला जा रहा है. यहां पर दर्जनों अवैध खदान स्थित है जिससे यहां प्रतिदिन कोयले की खुदाई बदस्तूर जारी है. इस कार्य में कोयला माफिया स्थानीय ग्रामीण का सहयोग लेते हैं. केसाफुल्ली पहाड़ पर दर्जनों कुआंनुमा अवैध कोयला खदान से जो कोयला निकलता है उसे साइकिल, मोटरसाइकिल, बैलगाड़ी पर लादकर आसपास के गांवों में चोरी-छिपे डंप करते हैं और उक्त कोयला को माफिया ट्रक व ट्रैक्टर के माध्यम से बरहरवा के रास्ते पश्चिम बंगाल व बरहेट, बोरियो, साहिबगंज, मिर्जाचौकी होते हुए बिहार आदि क्षेत्रों में खपाते हैं. इस कार्य में प्रतिदिन लगभग सैकड़ों लोग लगे हुए हैं. कोयले की खदान में सीढ़ीनुमा घाट बनाकर ग्रामीण खदान में नीचे उतरते हैं और सब्बल से कोयले खोदकर निकाल रहे हैं. जो तीन से चार सौ रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचा जाता है. सीढ़ीनुमा कोयला खदान से एक बार में एक बोरा कोयला नीचे खोदकर उपर लाया जाता है. इसके बाद साइकिल व मोटरसाइकिल से कोयले की अवैध ढुलाई की जाती है.
केसाफुल्ली के अवैध खदान मेें बनाया गया सुरंग व मोटरसाइकिल पर कोयला लाद ले जाते लोग.
सफेदपोशों का है सह
बताया जाता है कि इस अवैध काले धंधे में सफेदपोशों का सह प्राप्त है. यहां अवैध खनन करने व करवाने वालों की पैठ राजधानी रांची तक है. सफेदपोश तो प्रशासन के सामने खुलकर नहीं आ रहे हैं. लेकिन अंदरखाने उनका समर्थन भरपुर प्राप्त है. इस अवैध खदान से सफेदपोशों को अच्छी खासी उगाही होती है. चुनाव के वक्त में ये कोयला माफिया ही सफेदपोशों को चुनाव के वक्त इनके पक्ष में खुलकर कार्य भी करता है.
पुलिस भी नहीं कर पाती कार्रवाई
केसाफुल्ली में अवैध कोयला खदान से कोयला तो प्रतिदिन निकलता है और पुलिस मूकदर्शक बनी रहती है. पुलिस इस बात से पुरी तरह वाकिफ है कि इस धंधे में कौन-कौन से लोग शामिल हैं. लेकिन कार्रवाई नहीं कर पाती है. सवाल यह उठता है कि पुलिस आखिर चुप क्यों है. क्या कोयला माफियाओं के सामने पुलिस कमजोर पड़ रही है. या फिर दबाव में है.बहरहाल जो भी हो पुलिस अगर सख्ती से कार्रवाई करे तो फिर से कोयला उत्खनन का कार्य पूर्णरूप से बंद हो सकता है.
