रांचीः रिम्स में विभागाध्यक्ष की रोटेशन प्रक्रिया पर अचानक रोक लगा दी गई है. हालांकि रोटेशन प्रक्रिया पर रिम्स शासी परिषद की 52वीं बैठक में फैसला लिया गया था. यह बैठक 11 अक्तूबर 2021 को हुई थी. रोटेशन प्रक्रिया में तीन-तीन साल के बाद विभागाध्यक्ष का रोटेशन होना था. एनएमसी की गाइडलाइन में भी इसका स्पष्ट उल्लेख है कि विभागाध्यक्ष में रोटेशन प्रक्रिया का पालन करना है. इसी आधार पर वर्ष 2021 से विभागों में रोटेशन पर विभागाध्यक्षों को जिम्मेदारी दी गई थी.
प्रोफेसरों की बारी आते ही रोटेशन पर लगी रोक
जानकार बताते हैं कि अब जब प्रोफेसर पद पर सेवा दे रहे अन्य डॉक्टरों के विभागाध्यक्ष बनने की बारी आई तो इस नियम पर अचानक रोक लगा दी गई है. रिम्स के 60 डॉक्टरों ने रोटेशन प्रक्रिया पर रोक लगाने का विरोध किया है. इसे लेकर उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी और स्वास्थ्य सचिव डॉ अजय कुमार सिंह को पत्र भी लिखा है. पत्र में एनएमसी और रिम्स जीबी के फैसले का उल्लेख किया गया है. सूत्रों ने बताया कि रोटेशन प्रक्रिया पर हाइकोर्ट का निर्देश भी वर्ष 2022 में आया था, इसलिए इसे तत्काल लागू किया जाए.
सीनियर डॉक्टरों ने जतायी थी आपत्ति
सूत्र बताते हैं कि विभागाध्यक्ष के रोटेशन की प्रक्रिया पर रोक लगाने का निर्देश हाल ही में हुई 65वीं जीबी बैठक में लिया गया है. रिम्स के सीनियर डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर बताया था कि वह जूनियर के नीचे काम करने में असहज होंगे. इसके बाद रोटेशन पर विभागाध्यक्ष की अधिसूचना जारी नहीं करने का निर्देश रिम्स प्रबंधन को दिया गया है.
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