3 साल से बिस्तर पर लाचार थी महिला, रांची सदर अस्पताल में आयुष्मान योजना से फ्री में हुई जटिल न्यूरोसर्जरी

रांची सदर अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग ने एक बार फिर चमत्कार कर दिखाया है. 57 वर्षीय बिंदु देवी, जो सर्वाइकल स्पाइनल कॉर्ड ट्यूमर के कारण तीन साल से बिस्तर पर थीं, उन्हें डॉक्टरों की टीम ने नया जीवनदान दिया है. यह जटिल ऑपरेशन आयुष्मान भारत योजना के तहत पूरी तरह मुफ्त किया गया.

रांची: रांची स्थित सदर अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग ने एक बार फिर चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी मिसाल कायम की है. न्यूरोसर्जन डॉ. विकास के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने औरंगाबाद (बिहार) की 57 वर्षीय बिंदु देवी को एक जटिल ऑपरेशन के बाद नया जीवनदान दिया है. मरीज पिछले करीब तीन वर्षों से सर्वाइकल स्पाइनल कॉर्ड के अंदर बने एक खतरनाक ट्यूमर से पीड़ित थीं. ट्यूमर की वजह से उनके दोनों हाथों की ताकत लगभग खत्म हो चुकी थी और पैर भी पूरी तरह कमजोर हो गए थे, जिससे वह लंबे समय से बिस्तर पर लाचार पड़ी थीं. जांच के बाद न्यूरोसर्जरी टीम ने इस चुनौती को स्वीकार किया और 5 घंटे तक चले मैराथन ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. सर्जरी के महज तीन दिनों के भीतर ही महिला के हाथों और पैरों में मूवमेंट व ताकत वापस आने लगी है.

देश के बड़े अस्पतालों ने फेरा मुंह

मरीज के परिजनों ने बताया कि वे इलाज की आस में पिछले तीन सालों से दर-दर भटक रहे थे. उन्होंने पटना के कई बड़े सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों, बनारस स्थित बीएचयू (BHU) और लखनऊ के एसजीपीजीआई (SGPGI) तक में डॉक्टरों से परामर्श लिया. इस दौरान वे इलाज और जांच के नाम पर करीब 7 से 8 लाख रुपये गंवा चुके थे, लेकिन ट्यूमर की स्थिति को अत्यंत जटिल और जोखिम भरा बताकर कई जगहों से उन्हें लौटा दिया गया. अंत में थक-हारकर परिजन मरीज को रांची सदर अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग लेकर आए, जहां डॉक्टरों ने इस नामुमकिन से दिखने वाले ऑपरेशन को मुमकिन कर दिखाया.

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स्पाइनल कॉर्ड के अंदर था ट्यूमर

डॉक्टरों के अनुसार यह ऑपरेशन बेहद संवेदनशील था, क्योंकि ट्यूमर सर्वाइकल स्पाइनल कॉर्ड के बिल्कुल अंदर स्थित था. जरा सी चूक से मरीज को ताउम्र के लिए लकवा (पैरालिसिस) मारने या जान जाने का गंभीर खतरा बना रहता था. निजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में इस तरह के पैकेज का खर्च आमतौर पर 5 से 8 लाख रुपये तक आता है, लेकिन सदर अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत यह पूरी सर्जरी बिल्कुल मुफ्त की गई. इस ऐतिहासिक सफलता पर रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार और अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विमलेश सिंह ने न्यूरोसर्जरी टीम की जमकर सराहना की. इस कठिन ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. ज्योतिका के अलावा ओटी टेक्निकल स्टाफ रामिज, सोहेल, संजू, अमन और पूनम की भी अहम भूमिका रही.

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By Bipin kumar singh

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