रांची. जिस मशीन को इंसान ने अपना काम आसान बनाने के लिए बनाया था, वही अब इंसान के काम, सोच और फैसलों को चुनौती देने लगी है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआइ आने वाले समय में केवल कंप्यूटर या मोबाइल तक सीमित तकनीक नहीं रहेगा. यह तय करने में भी भूमिका निभायेगा कि कौन सा काम इंसान करेगा, कौन सा काम मशीन करेगी और किस सूचना पर भरोसा किया जा सकता है.
नौकरियों के बदलते स्वरूप, डीपफेक और फर्जी सूचनाओं के बढ़ते खतरे के बीच सवाल यह है कि एआइ के दौर में इंसान अपनी सबसे बड़ी ताकत कैसे बचाये रखे. इन्हीं सवालों पर झारखंड कैडर के आइएएस अधिकारी डॉ मनीष रंजन की एआइ पर केंद्रित नयी पुस्तकों में विस्तार से चर्चा की गयी है.
मशीन से मुकाबला नहीं, उसे साधने की जरूरत
डॉ मनीष रंजन की पुस्तकों का प्रमुख संदेश है कि एआइ से मुकाबला करने के बजाय उसके साथ काम करने की क्षमता विकसित करनी होगी. तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय संवेदना, रचनात्मकता, संवाद, समस्या समाधान और नैतिक निर्णय जैसी क्षमताएं भविष्य में भी इंसान को प्रासंगिक बनाये रख सकती हैं.
उनकी पुस्तकों में एआइ के अवसरों के साथ उससे जुड़े जोखिमों को भी अलग-अलग नजरिये से समझाने का प्रयास किया गया है. इनमें एआइ : कंसेप्ट एंड अप्लीकेशन, विन द एआइ डिकेड, 20 कैरियर्स दैट विल विन बाई 2033, एआइ एंड द वार फॉर ट्रुथ और एआइ फॉर एवरीवन शामिल हैं.
गांव और आम लोगों तक पहुंचे एआइ
एआइ फॉर एवरीवन में एआइ के लाभ को गांव और आम लोगों तक पहुंचाने की संभावनाओं पर जोर दिया गया है. झारखंड जैसे राज्य में स्थानीय भाषा और जरूरतों के अनुसार एआइ का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाने में किया जा सकता है.
एआइ आधारित तकनीक स्थानीय स्तर पर लोगों तक जरूरी जानकारी पहुंचाने, सेवाओं की उपलब्धता आसान करने और अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने के तरीके को बदलने की क्षमता रखती है. ऐसे में तकनीक को केवल शहरी या विशेषज्ञों तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों तक पहुंचाना भी बड़ी चुनौती होगी.
डीपफेक और फर्जी सूचना भी बड़ी चुनौती
एआइ के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डीपफेक और फर्जी सूचनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है. तस्वीर, वीडियो और आवाज में बदलाव कर किसी व्यक्ति या घटना को अलग रूप में पेश किया जा सकता है. ऐसे दौर में सूचना की विश्वसनीयता की पहचान करना भी जरूरी कौशल बनता जा रहा है.
डॉ मनीष रंजन की एआइ एंड द वार फॉर ट्रुथ इसी चुनौती की ओर ध्यान खींचती है. वहीं 20 कैरियर्स दैट विल विन बाई 2033 के जरिये एआइ के दौर में बदलते रोजगार और भविष्य के करियर विकल्पों को समझाने का प्रयास किया गया है.
