ranchi news : पुस्तक करियरोथॉन के लेखक गुरचरण सिंह गांधी से खास गुफ्तगू, कहा : जिंदगी एक मैराथन है, फिनिशर बनना जरूरी

झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिला के झींकपानी में जन्मे गुरचरण सिंह गांधी लेखक के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं. वे एक बड़े टेलीकॉम कंपनी में चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर हैं.

By Prabhat Khabar News Desk | May 12, 2025 1:06 AM

रांची. झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिला के झींकपानी में जन्मे गुरचरण सिंह गांधी लेखक के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं. वे एक बड़े टेलीकॉम कंपनी में चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर हैं. अपनी प्रोफेशनल लाइफ से समय निकाल कर अब तक चार किताबें लिख चुके हैं. इसमें दो फिक्शन व दो नॉन फिक्शन किताबें हैं. फिलहाल मुंबई मे रहते हैं. जिमखाना क्लब में आयोजित चैप्टर वन कार्यक्रम में शामिल हुए लेखक गुरचरण सिंह गांधी से प्रभात खबर संवाददाता क्रांति दीप ने खास बातचीत. पढ़िए प्रमुख अंश़

प्रोफेशनल लाइफ और लिखने के शौक को कैसे मैनेज करते हैं?

यह आसान नहीं है बहुत स्ट्रांग टाइम मैनेजमेंट करना पड़ता है. अनुशासन का पालन करना पड़ता है. इधर-उधर की अनावश्यक चीजों को दरकिनार करना पड़ता है. तब जाकर इन दोनों पहलुओं पर काम कर सकते हैं. लिखना शौक भी और अच्छा भी लगता है. लिखना एक इमोशनल जरूरत भी है. जैसे नौकरी एक फाइनेंशियल जरूरत है. मैं दोनों को बैलेंस कर लेता हूं.

आगे और किन-किन विषयों पर लिखना चाहते हैं?

जब पिछली किताब खत्म होती है, तब आगे आने वाले समय में क्या लिखूंगा इसका बहुत कुछ प्लान नहीं होता है. विषय अचानक से टपकता है. अचानक से आता है. फिर लगता है इस विषय पर शोध करना चाहिए. चाहत है अगली किताब फंक्शन लिखूं.

आप लिखने से पहले किन-किन चीजों पर काम करते हैं?

सबसे पहले सोचता हूं कि मेरे पास कहने को क्या है. किस विषय पर लिखना चाहिए. अगर कुछ ओरिजिनल नहीं है, तो मैं नहीं लिखता हूं. मैं सिर्फ किताब लिखने के लिए नहीं लिखता हूं. लगता है कि कुछ ओरिजिनल होना चाहिए, जो दुनिया के सामने लेकर आये. एक नया दृष्टिकोण होना चाहिए.

नये लेखकों को क्या संदेश देना चाहेंगे?

बहुत पढ़िए. जब तक अच्छा पढ़ेंगे नहीं, तब तक अच्छा लिख नहीं पायेंगे. जितनी जरूरत क्रिएटिविटी की है, उतनी ही जरूरत ओरिजिनलिटी की भी है. अगर कुछ ओरिजिनल नहीं है तो ना लिखें. सिर्फ फेमस होने के लिए मत लिखिए. अपनी क्रिएटिविटी प्रस्तुत करने के लिए लिखिए. लिखने के लिए अनुशासन की भी उतनी जरूरत है, जितनी इंस्परेशन की जरूरत होती है.

आपकी पुस्तक करियरअथॉन क्या मैसेज देती है?

यह पुस्तक मेरे 50 मैराथॉन के अनुभव पर आधारित है. इसमें यह संदेश है कि लाइफ मैराथन है. करियर मैराथन है. लंबी दूरी तय करने के लिए टैलेंट चाहिए, मेहनत चाहिए. लेकिन जो सबसे ज्यादा चाहिए वह धैर्य है. आखिरी तक भागने की क्षमता को धैर्य कहते हैं. रेस को नहीं छोड़ने की काबिलियत को धैर्य कहते हैं. दुनिया विनर और लूजर्स के चक्कर में फंसी हुई है. सबसे ज्यादा जरूरत है फिनिशर की.

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