रिम्स के जवाब से हाईकोर्ट असंतुष्ट, पूछा- हमारे आदेश का पालन अब तक क्यों नहीं हुआ

झारखंड हाईकोर्ट ने रिम्स में मरीजों के इलाज और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली पर राज्य सरकार और रिम्स प्रशासन के प्रति कड़ी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है.

रांची : रिम्स में मरीजों को बेहतर इलाज और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के मामले में झारखंड हाइकोर्ट ने राज्य सरकार और रिम्स प्रशासन के प्रति कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने अपने पूर्व आदेशों का पालन नहीं होने पर नाराजगी जताते हुए स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी.

चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका तथा प्रार्थी ज्योति शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका पर एक साथ सुनवाई की.

रिम्स के शपथ पत्र पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने रिम्स की ओर से 21 जुलाई को दाखिल शपथ पत्र पर असंतोष जताया. अदालत ने कहा कि रिम्स में आवश्यक मशीनरी और मेडिकल उपकरणों की खरीद, रिक्त पदों पर नियुक्ति तथा जर्जर भवनों की मरम्मत जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए पहले ही समय-सीमा तय की गई थी, लेकिन अब तक उनका पालन नहीं किया गया.

खंडपीठ ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे स्वयं इस पूरे मामले का निरीक्षण करें और बताएं कि अदालत के निर्देशों के बावजूद कार्य पूरे क्यों नहीं हुए. इस संबंध में उन्हें व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र दाखिल करना होगा.

याचिकाकर्ता ने कहा- एक भी काम समय पर पूरा नहीं हुआ

प्रार्थी ज्योति शर्मा की ओर से अधिवक्ता दीपक कुमार दुबे ने अदालत को बताया कि 18 फरवरी 2026 को कोर्ट ने विभिन्न कार्यों को पूरा करने के लिए समय-सीमा बढ़ाई थी, लेकिन तय अवधि के भीतर एक भी कार्य पूरा नहीं किया गया.

उन्होंने अदालत से कहा कि रिम्स प्रशासन ने कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया है और मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.

रिम्स की बदहाल व्यवस्था पर स्वत: संज्ञान

उल्लेखनीय है कि रिम्स में इलाज की बदहाल व्यवस्था और मरीजों को हो रही परेशानियों को देखते हुए झारखंड हाइकोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया था. बाद में प्रार्थी ज्योति शर्मा ने भी जनहित याचिका दायर कर रिम्स की स्वास्थ्य सेवाओं और आधारभूत सुविधाओं में सुधार की मांग की. दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ की जा रही है.

इन कार्यों के लिए मिला था तीन से छह माह का अतिरिक्त समय

रिम्स के अनुरोध पर हाईकोर्ट ने 18 फरवरी 2026 की सुनवाई में विभिन्न कार्यों के लिए पहले निर्धारित समय-सीमा में तीन से छह माह तक का विस्तार दिया था.


हालांकि अदालत ने पाया कि समय विस्तार मिलने के बावजूद अधिकांश कार्य पूरे नहीं किए गए. इसी कारण अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारी से व्यक्तिगत जवाब तलब किया है.

17 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

खंडपीठ ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर निर्धारित की है. अब अदालत की निगाह इस बात पर रहेगी कि रिम्स प्रशासन और राज्य सरकार मरीजों के इलाज, आधारभूत सुविधाओं और रिक्त पदों को भरने संबंधी आदेशों का पालन किस प्रकार सुनिश्चित करते हैं.

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By Rana pratap

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