रांची विवि में हिंदी दिवस पखवाड़े में कवि सम्मेलन, हिंदी-उर्दू साहित्य के संगम ने बांधा समां

रांची विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग और हिंदी साहित्य अकादमी द्वारा हिंदी दिवस पखवाड़े के उपलक्ष्य में एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस आयोजन में हिंदी और उर्दू साहित्य के बीच सौहार्द का अद्भुत संगम देखने को मिला.

रांची. हिंदी दिवस पखवाड़ा के तहत रांची विवि के उर्दू विभाग व हिंदी साहित्य अकादमी की ओर से शनिवार को कवि सम्मेलन सह सम्मान समारोह किया गया. इस सम्मेलन में हिंदी व उर्दू साहित्य की समृद्ध परंपरा, आपसी भाईचारे और साहित्यिक सौहार्द्र का अद्भुत संगम दिखा. संयोजक व हिंदी साहित्य अकादमी की अध्यक्ष डॉ मीना बंधन ने आगंतुकों का स्वागत किया. उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ रिजवान अली ने सम्मेलन की विस्तृत रूपरेखा व प्रतिवेदन प्रस्तुत किया व कवियों को सम्मानित किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कवयित्री डॉ सुरेंद्र कौर नीलम ने की. संचालन कवि मनोज चौहान ने किया.

कई कवियों ने प्रस्तुत की रचनाएं

इस अवसर पर सरोज झारखंडी, एमजे अकबर, चंदन प्रजापति, उपासना सिन्हा, किरण राज, माला, इकबाल जमानवी, अंकिता सिन्हा, करुणा कालिका, उर्मिला सिन्हा, पुष्पा सहाय गिन्नी, शाहब हमजा, अनुभव शुक्ला, कोमल, डॉ रजनी शर्मा, रिम्मी वर्मा, बालाशंकर, श्रीवास्तव जागृति, शिप्रा शालिनी, ज्ञानेश, कल्पना कौशल लाल, सीमा कुमार, रेणु झा रेणुका, अमन प्रियदर्शी, डॉ नीता व गुरुकमल सिंह सहित अनेक कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया.

ये रहे उपस्थित

इस अवसर पर रांची विवि हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष सह साहित्यकार डॉ अरुण कुमार सहित आचार्यकुल के उपाध्यक्ष डॉ वासुदेव प्रसाद, डॉ कमल बोस, डॉ अर्चना दुबे, एजाज अहमद, दौलत राम शर्मा, डॉ ओम प्रकाश सहित कई शिक्षक, शोधार्थी व विद्यार्थी उपस्थित थे.

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लेखक के बारे में

By संजीव कुमार

संजीव कुमार सिंह, वर्तमान में प्रभात खबर, रांची में विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. वह 14 वर्षों (2005 से 2019) तक प्रभात खबर रांची में मुख्य संवाददाता रहे हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 29 वर्षों का अनुभव है. लंबे पत्रकारिता जीवन में खोजी, विश्लेषणात्मक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर अनेक महत्वपूर्ण रिपोर्टें प्रकाशित की हैं. प्रभात खबर द्वारा बेस्ट रिपोर्टर का अवार्ड भी दिया गया. इनकी विशेष पहचान झारखंड के उच्च शिक्षा तंत्र, विश्वविद्यालयों, प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी नियुक्तियों व प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग के लिए रही है. झारखंड लोक सेवा आयोग के गठन के बाद सिविल सेवा, व्याख्याता, इंजीनियर, जैसी नियुक्तियों में गड़बड़ी को उजागर किया.

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