रांची यूनिवर्सिटी से पीएचडी करेंगे अफ्रीका के दो छात्र, 331 सीटों के लिए मिले 468 आवेदन

रांची विश्वविद्यालय में पीएचडी की 331 सीटों के लिए 468 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसमें अफ्रीका के दो छात्र भी शामिल हैं। हार्ड कॉपी जमा करने की तिथि बढ़ाई गई।


रांची: रांची विश्वविद्यालय से अफ्रीका के दो छात्र पीएचडी करेंगे. विश्वविद्यालय में पीएचडी रेगुलेशन 2026 के अनुसार, पीएचडी प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की तिथि गुरुवार को समाप्त हो गई, जबकि जमा कराए गए आवेदन की हार्ड कॉपी जमा करने की अंतिम तिथि 11 सितंबर तक बढ़ा दी गई है.

हार्ड कॉपी जमा कराने की बढ़ी डेट की अधिसूचना जारी

रिसर्च निदेशक डॉ परवेज हसन ने बताया कि पूर्व में हार्ड कॉपी जमा करने की तिथि 10 सितंबर तक निर्धारित थी, लेकिन विश्वविद्यालय में अवकाश की घोषणा के कारण छात्रहित में तिथि बढ़ाई गई है. इस बाबत सदस्य सचिव डॉ नीरज ने अधिसूचना जारी कर दी है.

बांग्ला भाषा की कोई सीट खाली नहीं

इस बीच विवि में अब तक 468 आवेदन आये हैं. इनमें दो विदेशी आवेदन भी आये हैं. दोनों आवेदन अफ्रीका से आये हैं. विवि में कुल 331 सीटें निर्धारित हैं. इनमें बांग्ला में कोई सीट खाली नहीं है. जबकि सबसे अधिक सीटें जंतुविज्ञान में 30 हैं और सबसे कम मुंडारी में एक सीट ही रिक्त है. कुल 331 सीटों में 153 सीट सामान्य जाति, ईवीएस के 16 सीट, एसटी के 85 सीट, एससी के 34 सीट, बीसी वन के 30 सीट और बीसी टू के 13 सीट हैं.

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पीएचडी में पहली बार आरक्षण रोस्टर लागू

नई शिक्षा नीति के तहत पहली बार पीएचडी के लिए स्नातक (चार वर्षीय ऑनर्स विथ रिसर्च) के विद्यार्थियों को भी सशर्त शामिल किया गया है. इसमें विद्यार्थियों को कम से कम 75 प्रतिशत अंक या समकक्ष सीजीपीए प्राप्त करना होगा. जबकि पीजी के विद्यार्थियों के लिए न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक अनिवार्य है. इस बार पीएचडी प्रवेश परीक्षा नहीं हो रही है. जबकि पीएचडी नामांकन आवेदन भी बिना किसी शुल्क के जमा कराया गया है. पहली बार पीएचडी नामांकन में आरक्षण रोस्टर का पालन किया जा रहा है.

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लेखक के बारे में

By संजीव कुमार

संजीव कुमार सिंह, वर्तमान में प्रभात खबर, रांची में विशेष संवाददाता के पद पर कार्यरत हैं. वह 14 वर्षों (2005 से 2019) तक प्रभात खबर रांची में मुख्य संवाददाता रहे हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 29 वर्षों का अनुभव है. लंबे पत्रकारिता जीवन में खोजी, विश्लेषणात्मक और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर अनेक महत्वपूर्ण रिपोर्टें प्रकाशित की हैं. प्रभात खबर द्वारा बेस्ट रिपोर्टर का अवार्ड भी दिया गया. इनकी विशेष पहचान झारखंड के उच्च शिक्षा तंत्र, विश्वविद्यालयों, प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी नियुक्तियों व प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर गहन और तथ्यपरक रिपोर्टिंग के लिए रही है. झारखंड लोक सेवा आयोग के गठन के बाद सिविल सेवा, व्याख्याता, इंजीनियर, जैसी नियुक्तियों में गड़बड़ी को उजागर किया.

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