रांची : राजधानी रांची में अपराध पर नकेल कसने के लिए रांची पुलिस ने 'प्रिवेंटिव पुलिसिंग' को अपनी प्राथमिकता बनाया है. एसएसपी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित समीक्षा बैठक में पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे पिछले 10 से 15 वर्षों में सक्रिय रहे अपराधियों और गिरोहों का डेटाबेस अपडेट करें. पुलिस अपराधियों की प्रोफाइलिंग और 'गैंग मैपिंग' कर उनकी संदिग्ध गतिविधियों पर पहले से ही नजर रखेगी. इस विशेष निगरानी सूची में हत्या, रंगदारी, भू-माफिया, नशा तस्करी, अवैध शराब, चोरी और जुआ-मटका से जुड़े अपराधियों को शामिल किया जाएगा, जिनका रिकॉर्ड थानों के 'बैड कैरेक्टर रजिस्टर' में दर्ज कर नियमित सत्यापन किया जाएगा.
बाइकर्स गैंग, हुड़दंगियों और सोशल मीडिया पर शिकंजा
पुलिस उन युवाओं और समूहों पर भी कड़ी निगरानी रखने जा रही है, जिनकी गतिविधियां अपराध की दिशा में बढ़ने का संकेत देती हैं. इसके तहत शिक्षण संस्थानों के बाहर छेड़खानी करने वालों, दबंगई दिखाने वाले युवाओं और खतरनाक स्टंट करने वाले बाइकर्स गैंग पर विशेष नजर रखी जाएगी. इसके साथ ही डिजिटल स्पेस पर माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर भी पुलिस का चाबुक चलेगा. सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट, भड़काऊ रील और एडिटेड वीडियो के जरिए शांति व्यवस्था भंग करने वालों की कानूनी निगरानी की जाएगी और थानों को सूचना मिलते ही तुरंत कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की हिदायत दी गई है.
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पारदर्शिता के लिए 606 थानों में लगेंगे 9,006 नाइट-विजन कैमरे
झारखंड के पुलिस थानों में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और फरियादियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है. सुप्रीम कोर्ट के (परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह) ऐतिहासिक आदेश के आलोक में राज्य के 606 थानों में 9,006 ऑडियो-वीडियो युक्त हाईटेक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे. गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने इसके लिए 90 करोड़ रुपये के पुनरीक्षित बजट को मंजूरी दी है, जिसे पांच चरणों में लागू किया जाएगा. वित्त वर्ष 2026-27 में कैमरों की खरीद और स्थापना पर 52.90 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. जैप-आईटी (JAP-IT) के माध्यम से लगने वाले इन कैमरों की लाइव निगरानी 24 जिलों के सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल रूम से हाई-स्पीड इंटरनेट के जरिए होगी, जिसकी नियमित समीक्षा डीजीपी और आईटी सचिव करेंगे.
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