रांची. विश्व रेबीज जागरूकता सप्ताह के तहत झारखंड में 22 से 28 सितंबर तक लोगों को रेबीज से बचाव और समय पर उपचार के प्रति जागरूक किया जाएगा. इस वर्ष की थीम “स्ट्रॉन्गर टुगेदर” है. स्वास्थ्य विभाग ने राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत यह संदेश दिया है कि रेबीज जानलेवा बीमारी है, लेकिन समय पर उपचार और पूर्ण टीकाकरण से इससे बचाव संभव है.
अस्पताल में रोजाना करीब 200 से 250 नए-पुराने मरीज पहुंचने की रिपोर्ट है. अकेले रांची सदर अस्पताल में जनवरी से जून 2026 के बीच 52,669 डॉग-बाइट के मामले दर्ज किए गए थे. इस लिहाज से राज्य में कुत्तों के काटने के बढ़ते मामलों के बीच अभियान लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक किया जाएगा.
पलामू में जनवरी से 22 मई तक 1,573 डॉग-बाइट मामले दर्ज हुए, जिनमें अकेले मई के 22 दिनों में 186 मामले थे. धनबाद मेडिकल कॉलेज में पिछले महीने 25 अगस्त को एक ही दिन 134 लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन दी गई.
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पालतू जानवरों के खरोंच को गंभीरता से लें
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कुत्ते, बिल्ली या बंदर के काटने अथवा खरोंचने पर घाव को तुरंत साबुन और बहते साफ पानी से धोना चाहिए. घाव पर मिर्च, तेल या कोई घरेलू पदार्थ नहीं लगाना चाहिए. इसके बाद नजदीकी एंटी रेबीज क्लिनिक पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार टीकाकरण पूरा करना जरूरी है.
अभियान के दौरान पालतू जानवरों का नियमित टीकाकरण कराने की भी अपील की गयी है.
खास बातें
- कब तक चलेगा अभियान : 22 से 28 सितंबर
- रांची : छह माह में 52,669 डॉग-बाइट मामले
- तुरंत उपाय : घाव को साबुन और बहते पानी से धोएं
- टीकाकरण : चिकित्सक की सलाह के अनुसार पूरा कोर्स लें
- हेल्पलाइन : आपात स्थिति में एम्बुलेंस के लिए 108, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी व शिकायत के लिए 104 नंबर डायल करें
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