पिपरवार: सरकार की विकास योजनाओं से उपेक्षित कोयलांचल के नगडुआ और पड़रियाटांड़ गांव के ग्रामीणों ने जुगाड़ तकनीक से नाले पर लकड़ी का पुल बना लिया है. यह पुल मानसून के दौरान ग्रामीणों के आवागमन में सहायक साबित हो रहा है. पहले नाले में पानी बढ़ने पर दोनों गांवों का संपर्क कट जाता था, लेकिन अब पुल बनने से दोपहिया वाहनों का भी आवागमन संभव हो गया है.
इससे किसानों को कृषि कार्य के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक बिचड़े पहुंचाने में सुविधा मिल रही है. ग्रामीणों ने बताया कि आजादी के करीब 80 वर्ष बाद भी गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. पड़रियाटांड़ गांव के दोनों छोर पर बड़े नाले होने के कारण बारिश के दिनों में गांव टापू बन जाता है. चार महीने तक लोगों का आवागमन लगभग ठप हो जाता है और उन्हें घरों में ही रहना पड़ता है.
ग्रामीणों ने बताया कि बचरा एक नंबर चौक से पताल गांव तक सड़क अब भी कच्ची है. इस मार्ग पर तीन स्थानों पर स्थित होसिर नाला बरसात के दिनों में बड़ी समस्या बन जाता है. कई बार प्रखंड प्रशासन के अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण किया, लेकिन अब तक पुल निर्माण नहीं हो सका है. मजबूरी में ग्रामीण रेल लाइन के किनारे बनी कच्ची सड़क से आवागमन करते हैं. अधिक बारिश होने पर यह रास्ता भी बंद हो जाता है.
ग्रामीणों ने बड़कागांव विधायक और हजारीबाग सांसद से बचरा एक नंबर चौक से पताल गांव तक पक्की सड़क तथा आवश्यक पुल-पुलियों का शीघ्र निर्माण कराने की मांग की है, ताकि बरसात के मौसम में आवागमन की समस्या से स्थायी राहत मिल सके.
