रांचीः राज्य के कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अब विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ पर्यावरण संरक्षण की व्यावहारिक सीख भी दी जायेगी. स्नातक स्तर पर मिशन लाइफ (लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट) कोर्स शुरू किया जा रहा है. दो क्रेडिट का यह कोर्स 10 सप्ताह का होगा. इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ जीवनशैली अपनाने के लिए तैयार करना है.
पहले चरण में यह कोर्स स्वयं प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन उपलब्ध कराया जा रहा है. कोर्स 21 अगस्त से 20 अक्तूबर 2026 तक चलेगा. इसमें नामांकन की अंतिम तिथि 31 अगस्त निर्धारित की गयी है. यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और कॉलेजों के प्राचार्यों को इसकी जानकारी दी है.
रोजमर्रा की आदतों में बदलाव पर जोर
मिशन लाइफ कोर्स में विद्यार्थियों को ऊर्जा और पानी की बचत, एकल उपयोग वाले प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने, कचरा प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे विषयों की जानकारी दी जायेगी. इसका उद्देश्य केवल पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को ऐसी जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है, जिससे संसाधनों का अनावश्यक दोहन कम हो.
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एनइपी के तहत पहल
यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के पाठ्यक्रम को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है.
ड्राफ्ट गाइडलाइन पर मांगे गए सुझाव
स्नातक स्तर पर मिशन लाइफ के लिए ड्राफ्ट गाइडलाइंस और करिकुलम फ्रेमवर्क तैयार कर लिया गया है. यूजीसी ने विद्यार्थियों, शिक्षण संस्थानों और आम लोगों से इस पर दो सप्ताह के भीतर सुझाव मांगे हैं. सुझावों की समीक्षा के बाद गाइडलाइंस और पाठ्यक्रम को अंतिम रूप दिया जायेगा. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट, भोपाल को दो क्रेडिट के इस 10 सप्ताह के कोर्स को स्वयं प्लेटफॉर्म पर तैयार करने की जिम्मेदारी दी गयी है.
झारखंड के विश्वविद्यालयों में लागू होने से होंगे ये फायदे
इस कोर्स के शुरू होने पर झारखंड के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के विद्यार्थियों के प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट में इसे जोड़ा जा सकता है. इसके तहत वर्षा जल संचयन, जल ऑडिट, सौर ऊर्जा, बिजली की खपत का ऑडिट और ऊर्जा बचत को विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाया जा सकता है. इससे कोर्स केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहेगा. रांची, जमशेदपुर और धनबाद जैसे शहरी क्षेत्रों के विश्वविद्यालयों में सिंगल यूज प्लास्टिक, ठोस कचरा और ई-कचरे को लेकर विद्यार्थियों से कैंपस ऑडिट कराया जा सकता है. वहीं, आदिवासी और पारंपरिक जीवनशैली को भी इससे जोड़ा जा सकेगा. स्कूलों में मिशन लाइफ के तहत एक लाख पौधे भी लगाये गए हैं.
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