रांची. कुड़ुख भाषा के साहित्य के विकास के लिए अधिक से अधिक पुस्तकों का लेखन जरूरी है. वर्तमान में कुड़ुख में नाटक, उपन्यास और आलोचनात्मक पुस्तकों का अभाव है. लेखन सभी विधाओं में होना चाहिए. ये बातें साहित्यकार महादेव टोप्पो ने सोमवार को प्रेस क्लब में कहीं. वे डॉ. मंजू कुमारी की पुस्तक ‘डॉ नारायण भगत : व्यक्तित्व और कृतित्व’ के लोकार्पण समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे. कार्यक्रम का आयोजन कुड़ुख साहित्य अकादमी की ओर से किया गया.
जीवित व्यक्तित्व पर लिखना चुनौतीपूर्ण : शंकुतला मिश्रा
झारखंड झरोखा की डॉ. शंकुतला मिश्रा ने कहा कि कुड़ुख में प्रकाशित यह पहली व्यक्तित्व और कृतित्व आधारित पुस्तक है. उन्होंने कहा कि किसी जीवित व्यक्तित्व पर लिखना चुनौतीपूर्ण होता है.
डॉ. सत्यनारायण उरांव ने लेखिका के प्रयास की सराहना की. प्रो. अगस्तीन कुजूर ने कहा कि पुस्तक तैयार करने में काफी शोध और मेहनत की गयी है.
मौके पर डॉ. देवकुमार धान, डॉ. मंजू कुमारी, सेराल मुर्मू और नीलेश उरांव समेत अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखे.
