रांची: भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा 15 दिनों के एकांतवास से बुधवार को बाहर आये, जिसके बाद उनका नेत्रदान उत्सव शुरू हुआ. इससे पूर्व उनका विशेष शृंगार किया गया और शाम पांच बजे पट खोल दिया गया. इसके बाद 108 दीपों की मंगल आरती हुई. उन्हें इलायची दाना, बादाम व मालपुआ का भोग लगाया गया. भक्त दोपहर तीन बजे से ही दर्शन के लिए जुटने लगे थे और रात 8:45 बजे तक पूजा-अर्चना की. मुख्य पुजारी रामेश्वर पाढ़ी ने पूजा संपन्न करायी. मौके पर पंडित कौस्तुभधरनाथ मिश्रा, ऋृषिकेश मोहंती सहित अन्य पुजारी मौजूद थे.
2 बजे तक होंगे भगवान के दर्शन
गुरुवार तड़के चार बजे मंदिर का पट खुला और सुबह पांच बजे से दर्शन शुरू हुआ. दोपहर दो बजे दर्शन बंद हो जायेगा. दोपहर 2:30 बजे तक भगवान के सभी विग्रहों को रथारुढ़ किया जायेगा और तीन बजे तक उनका शृंगार होगा. शाम पांच बजे रथ यात्रा शुरू होगी, जहां भक्त जयकारे के साथ भगवान को मौसीबाड़ी ले जायेंगे. शाम 6:45 बजे तक महिला भक्त रथ पर चढ़कर पूजा-अर्चना कर सकेंगी, जिसके बाद विग्रहों को मौसीबाड़ी में प्रवेश कराया जायेगा. शाम सात से आठ बजे तक आम भक्त पूजा कर सकेंगे और रात आठ बजे शयन होगा.
बाल भोग व अन्न भोग एक साथ लगेगा
रथयात्रा के दिन बाल भोग व अन्न भोग एक साथ लगेगा. साल में केवल इसी दिन दोनों भोग एक साथ लगते हैं. यहां अन्न के अलावा मीठे पुलाव का भी भोग लगेगा. वहीं रात में आठ बजे मालपुआ, बुंदिया व छिलका रोटी का भोग लगाया जायेगा.
नेत्रदान उत्सव के साथ मेला शुरू
भगवान के नेत्रदान उत्सव के साथ ही मेले की शुरुआत हो गयी है, जो 25 जुलाई तक चलेगा. मुख्य मंदिर से मौसीबाड़ी तक दुकानें सज गयी हैं और खाने-पीने के सामानों सहित विभिन्न सामग्रियों की बिक्री शुरू हो गयी है.
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