खनन से मिलने वाली रॉयल्टी कहां खर्च हो रही? ललित महतो ने केंद्र-राज्य सरकार से मांगा हिसाब

आजसू नेता ललित महतो ने कहा कि भाषा, संस्कृति और खतियान के आधार पर स्थानीय व नियोजन नीति बननी चाहिए, ताकि बाहरी घुसपैठियों पर अंकुश लग सके।

रांची. ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) बृहत झारखंड के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष ललित कुमार महतो ने कहा कि राज्य में स्थानीय और नियोजन नीति भाषा, संस्कृति और खतियान के आधार पर बननी चाहिए. इससे बाहरी घुसपैठ पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी. वह रविवार को करमटोली चौक स्थित प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बोल रहे थे.

उन्होंने कहा कि खनन और खनिज नीति को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए, क्योंकि झारखंड रॉयल्टी स्टेट है. खनन से मिलनेवाली रॉयल्टी का कितना प्रतिशत और शेष राशि का खर्च कहां होना चाहिए तथा वास्तव में कहां खर्च किया जा रहा है, इसकी जानकारी जनता को दी जानी चाहिए.

विस्थापितों और प्रभावितों पर खर्च का हिसाब मांगा

ललित कुमार महतो ने कहा कि जनता को यह जानने का भी अधिकार है कि विस्थापित और खनन प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास पर रॉयल्टी और शेष राशि का कितना प्रतिशत खर्च होता है और कितना खर्च होना चाहिए. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से जनता को मिलनेवाली रॉयल्टी और शेष राशि के बंटवारे को लेकर पारदर्शिता बरतने की मांग की.

इससे पूर्व मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर श्रद्धांजलि दी गयी. मौके पर रमेश साहू, रंजीत उरांव, बाबू भाई मानकी, एनुल भाई और विष्णु दास मौजूद थे.

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By Praveen kumar munda

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