रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट
Sudivya Sonu Death: झारखंड के दिवंगत उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू की प्रभात खबर डिजिटल के साथ हुई यह आखिरी बातचीत अब एक अहम दस्तावेज की तरह याद की जा रही है. रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में छात्रों के आंदोलन के दौरान प्रभात खबर के संवाददाता नवीन शर्मा ने 19 अगस्त 2026 को विशेष इंटरव्यू के दौरान सुदिव्य कुमार सोनू से बातचीत की थी. उस समय राज्य सरकार ने टीडीपीएल से जुड़ी 44 परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया था. इस निर्णय को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सुदिव्य सोनू ने सरकार का पक्ष विस्तार से रखा था और कहा था कि जब परीक्षा प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर पड़ जाए, तो सरकार की पहली जिम्मेदारी विश्वास बहाल करना होती है. उन्होंने साफ कहा था कि सरकार का हर फैसला न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है और अंतिम फैसला अदालत करेगी.
"सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांत पर लिया गया फैसला"
सुदिव्य सोनू ने कहा था कि सीजीएल मामले में सुप्रीम कोर्ट की भावना भी यही रही है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया पर लोगों का विश्वास डगमगा जाए, तो सरकार को उसे बहाल करने के लिए कदम उठाने चाहिए. उनके अनुसार 44 परीक्षाओं को रद्द करने का उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में भरोसा कायम करना था. उन्होंने कहा था, "जो भी फैसले हुए हैं, वे न्याय की कसौटी पर कसे जाएंगे. अगर विश्वास की कमी थी, तो सरकार का प्राथमिक कर्तव्य विश्वास की बहाली था."
टीडीपीएल को पहले ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया गया?
सबसे अहम सवालों में से एक था कि आखिर टीडीपीएल पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई. इस पर मंत्री ने कहा था कि परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसियों के खिलाफ देशभर में कोई साझा सूचना प्रणाली मौजूद नहीं है. एक राज्य में ब्लैकलिस्ट हुई एजेंसी की जानकारी दूसरे राज्यों तक स्वत: नहीं पहुंचती. इसी वजह से उन्होंने केंद्र सरकार को एक राष्ट्रीय रजिस्टर बनाने का सुझाव देने की बात कही थी, ताकि भविष्य में किसी एजेंसी को नियुक्त करने से पहले उसकी पूरी पृष्ठभूमि जांची जा सके.
"20 तारीख के आसपास मिले थे पुख्ता संकेत"
सुदिव्य सोनू ने बताया था कि सरकार को टीडीपीएल में गड़बड़ियों के ठोस संकेत अगस्त की 20 तारीख के आसपास मिले थे. इसके बाद ही सीआईडी सक्रिय हुई और छापेमारी शुरू हुई. उनका कहना था कि यदि पहले ऐसे संकेत मिलते, तो कार्रवाई भी पहले हो जाती. उन्होंने कहा था कि जांच के दौरान जब एजेंसी की संलिप्तता सामने आई, तब सरकार के लिए जरूरी हो गया कि टीडीपीएल से जुड़ी सभी परीक्षाओं को जांच के दायरे में लाया जाए.
सीजीएल अभ्यर्थियों की नाराजगी पर क्या कहा?
सीजीएल के चयनित अभ्यर्थियों द्वारा फैसले का विरोध किए जाने पर सुदिव्य सोनू ने माना था कि यह आसान निर्णय नहीं था. उन्होंने कहा कि सरकार इस बात को लेकर चिंतित थी कि कई लोग नौकरी भी कर रहे हैं और ऐसे फैसले उनके हितों को प्रभावित कर सकते हैं. फिर भी उन्होंने दोहराया था कि अंतिम फैसला अदालत करेगी और न्यायिक समीक्षा में यह स्पष्ट हो जाएगा कि कौन सा निर्णय सही था और कहां सुधार की जरूरत थी.
CBI जांच की मांग पर विपक्ष पर साधा था निशाना
बातचीत के दौरान उन्होंने सीबीआई जांच की मांग पर भी प्रतिक्रिया दी थी. उनका दावा था कि आंदोलन की शुरुआत में छात्रों की मुख्य मांग सीजीएल परीक्षा रद्द करने की थी, लेकिन बाद में राजनीतिक दलों के हस्तक्षेप से आंदोलन का स्वरूप बदल गया. उन्होंने कहा था कि अब जो धरना दिखाई दे रहा है, वह उन्हें छात्रों का कम और विपक्षी दलों का ज्यादा लगता है.
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सुधारों की जरूरत पर दिया था जोर
सुदिव्य सोनू ने बातचीत के अंत में कहा था कि सरकार भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए सुधारों पर काम करेगी. उनका मानना था कि झारखंड में ऐसी व्यवस्था विकसित होनी चाहिए, जिससे भविष्य में परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े न हों. यह बातचीत आज इसलिए भी खास है, क्योंकि इसमें उन्होंने भर्ती परीक्षाओं, प्रशासनिक जवाबदेही और व्यवस्था सुधार को लेकर अपना और सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण सार्वजनिक रूप से रखा था.
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