रांची से सुनील चौधरी की रिपोर्ट
JMM News, रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा(झामुमो) ने भारत निर्वाचन आयोग से झारखंड के मतदाताओं की सुविधा के लिए उत्तराखंड की तर्ज पर वर्ष 2003 की मतदाता सूची एवं बूथ मैपिंग से संबंधित ऑनलाइन खोज सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है. इस संबंध में झामुमो के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र भेजा है. पत्र में कहा गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जैसी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की सफलता मतदाताओं की सहज भागीदारी, सूचना तक सरल पहुंच तथा प्रशासनिक पारदर्शिता पर निर्भर करती है. झामुमो ने ध्यान दिलाया कि उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय ने वर्ष 2003 की विधानसभा निर्वाचक नामावली से संबंधित अभिलेखों को खोजने और सत्यापित करने के लिए एक समर्पित डिजिटल पोर्टल विकसित किया है.
2003 के ईपीआईसी नंबर के आधार पर खोज सकते हैं नाम
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बताया कि उत्तराखंड में मतदाता नाम के आधार पर, वर्ष 2003 के ईपीआईसी नंबर के आधार पर तथा गांव, गली, मोहल्ला और क्षेत्र के आधार पर अपना नाम खोज सकते हैं. इसके अलावा वर्ष 2003 की मतदाता सूची की पीडीएफ डाउनलोड करने और अन्य राज्यों की अंतिम एसआईआर मतदाता सूची में नाम खोजने की सुविधा भी उपलब्ध है. झामुमो ने यह भी उल्लेख किया कि उत्तराखंड में जिला वार वर्ष 2003 और वर्ष 2025 के मतदान केंद्रों की तुलनात्मक जानकारी उपलब्ध करायी गयी है, जिससे मतदाता पुराने और वर्तमान बूथों की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं.
Also Read: राष्ट्रपति ने बोकारो के जवान को दिया ‘शौर्य चक्र’, कश्मीर में 25 मीटर की दूरी से ढेर किया था आतंकी
झारखंड के लोगों को किन वजहों से हो रही परेशानी
पत्र में कहा गया है कि झारखंड में फिलहाल इस प्रकार की व्यापक और नागरिक-अनुकूल डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. इसके कारण मतदाताओं को पुरानी मतदाता सूचियों में नाम खोजने, मतदान केंद्रों की तुलना करने और ऐतिहासिक निर्वाचन अभिलेखों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. झामुमो ने निर्वाचन आयोग से आग्रह किया है कि झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय को आवश्यक निर्देश जारी कर उत्तराखंड मॉडल के अनुरूप नाम आधारित खोज, ईपीआईसी आधारित खोज, पुरानी मतदाता सूची की पीडीएफ डाउनलोड, बूथ मैपिंग तथा अन्य डिजिटल सुविधाएं विकसित करायी जायें. पार्टी का कहना है कि इससे मतदाताओं की भागीदारी बढ़ेगी और निर्वाचन प्रक्रिया के प्रति जनविश्वास मजबूत होगा.
Also Read: रॉबिन मिंज फेल, शरणदीप-उत्कर्ष के तूफान में उड़ी छोटानागपुर रॉयल्स
