रांची से सुनील कुमार झा की रिपोर्ट
झारखंड महिला पर्यवेक्षिका भर्ती में अब नियुक्ति की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ गयी है. समाज कल्याण विभाग की जांच में 28 अभ्यर्थियों के इडब्ल्यूएस और ओबीसी (नॉन क्रीमी लेयर) प्रमाणपत्र नियम के अनुसार नहीं मिले हैं. इस मामले में विभाग ने महाधिवक्ता से कानूनी राय मांगी है. झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) ने 444 स्वीकृत पदों के लिए 313 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा सरकार को भेजी थी. नियुक्ति से पहले प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान पता चला कि 19 इडब्ल्यूएस और नौ ओबीसी (नन क्रीमी लेयर) अभ्यर्थियों के पास आवेदन वर्ष 2023 का वैध प्रमाणपत्र नहीं है या वह नियम के अनुरूप नहीं है.
जेएसएससी ने 313 अभ्यर्थियों की भेजी अनुशंसा
61 मामलों की हो रही जांच
इधर, 313 अनुशंसित अभ्यर्थियों में से 61 मामलों की जांच चल रही है. इनमें 33 अभ्यर्थियों के स्नातक प्रमाणपत्र और 28 अभ्यर्थियों के इडब्ल्यूएस व ओबीसी प्रमाणपत्रों की जांच होगी.
आयोग के अधिकारी ने कहा
वहीं इस संबंध में पूछने पर झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता ने कहा कि सक्षम अधिकारी से बिना तथ्य जाने कुछ भी नहीं कहा जा सकता है.
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जांच के लिए बन सकती है राज्य स्तरीय टीम
महिला पर्यवेक्षिका नियुक्ति परीक्षा में राधा गोविंद विवि से सफल 33 अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों की जांच के लिए राज्य स्तर पर टीम गठित की जा सकती है. इधर विवि के कुलसचिव डॉ निर्मल मंडल ने इस संबंध में पूछे जाने पर बताया कि फिलहाल मामले की जांच को लेकर विवि से कोई जानकारी नहीं मांगी गयी है. उन्होंने कहा कि 313 अभ्यर्थी सफल हुए हैं, जिनमें 33 राधागोविंद विवि के हैं. यदि कोई जानकारी मांगी जायेगी, तो विवि उसे उपलब्ध करायेगा.
यह है नियम
नियमानुसार जिस आरक्षित वर्ग से अभ्यर्थी आवेदन करता है, उसके पास आवेदन के समय उसी वित्तीय वर्ष का वैध प्रमाणपत्र होना जरूरी है. इसी वजह से इन 28 अभ्यर्थियों की नियुक्ति अनुशंसा पर सवाल उठे हैं. अब महाधिवक्ता की राय के बाद आगे का फैसला लिया जायेगा.
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