BCCL पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका, 10 हजार लोगों की सड़क काटने और खनन सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का आरोप

धनबाद में BCCL पर सार्वजनिक सड़क काटने और खनन सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगा है. इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें करीब 10 हजार ग्रामीणों के प्रभावित होने का दावा किया गया है.


Jharkhand High Court: झारखंड में धनबाद के जहाजटांड़ बस्ती में सड़क काटने और कथित तौर पर खनन सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का मामला अब झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है. जहाजटांड़ निवासी खेमलाल महतो ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत जनहित याचिका (PIL) दायर कर आरोप लगाया है कि BCCL और उसकी आउटसोर्सिंग एजेंसी ने बस्ती को जोड़ने वाली एकमात्र सार्वजनिक सड़क काट दी, जिससे करीब 10 हजार ग्रामीण प्रभावित हुए हैं. याचिका में सड़क बहाल करने, सुरक्षित वैकल्पिक पक्की सड़क बनाने, DGMS से तत्काल निरीक्षण कराने और पूरी घटना की समयबद्ध जांच कराने की मांग की गई है.

2015 में बनी थी 1.65 करोड़ की सड़क

याचिका के अनुसार, भौरा से जहाजटांड़ तक 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क ग्रामीण कार्य विभाग ने 2015 में राज्य सरकार की योजना के तहत 1.65 करोड़ रुपये की लागत से बनवाई थी. याचिकाकर्ता का दावा है कि यह सार्वजनिक धन से बनी सड़क है, इसलिए इसे बिना कानूनी प्रक्रिया के काटना नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन है.

2019 से चार बार वादे, लेकिन सड़क नहीं बनी

याचिका में कहा गया है कि यह पहली घटना नहीं है. वर्ष 2019, 2020, 2021 और 2023 में BCCL ने अलग-अलग बैठकों और लिखित पत्रों में वैकल्पिक पक्की सड़क बनाने तथा मूल सड़क बहाल करने का आश्वासन दिया था. इनमें विधायक, अनुमंडल पदाधिकारी और BCCL के CMD स्तर की बैठकों में भी वादे किए गए, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला.

रात में 100 लोगों से सड़क काटने का आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया है कि 21 अगस्त 2026 की रात करीब 11:30 बजे BCCL और उसकी आउटसोर्सिंग एजेंसी ने 100 से अधिक लोगों को लगाकर बिना सरकारी आदेश और बिना ग्रामीणों को सूचना दिए सड़क काट दी. इसके बाद ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया, कोयला ढुलाई कई दिनों तक बाधित रही और मौके पर पुलिस तथा CISF की तैनाती करनी पड़ी. धनबाद के मेयर ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर सड़क बहाल होने तक परियोजना का काम रोकने की बात कही थी.

खनन सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का दावा

याचिका में DGMS पर भी कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया गया है. इसमें कहा गया है कि वैकल्पिक सड़क के किनारे 30 मीटर से अधिक ऊंचा ओवरबर्डन डंप लगभग 90 डिग्री ढलान पर खड़ा है, जबकि कोल माइंस रेगुलेशन-2017 के नियम 108 के तहत अधिकतम ढलान 37.5 डिग्री और आवश्यक बेंचिंग अनिवार्य है. साथ ही नियम 101 और 106 के तहत सड़क निर्माण और ओपनकास्ट खनन के मानकों का भी उल्लंघन होने का दावा किया गया है.

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हाईकोर्ट से क्या मांगी गई राहत

याचिका में हाईकोर्ट से सड़क तत्काल बहाल कराने या सुरक्षित पक्की वैकल्पिक सड़क उपलब्ध कराने, DGMS से निरीक्षण कराकर उल्लंघन मिलने पर गैर-अनुपालक खनन कार्य रोकने, सड़क काटने की घटना की जांच कराने और DGMS, जिला खनन पदाधिकारी तथा ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारी वाली स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है. इसके अलावा BCCL को समय-समय पर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने और भविष्य में बिना प्रशासनिक अनुमति सार्वजनिक सड़क नहीं काटने का स्थायी निर्देश देने की भी प्रार्थना की गई है.

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By Rana pratap

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